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RTE नियमों पर सवाल:1-3 किमी में स्कूल जरूरी, सरकार 5 किमी तक के स्कूल कर रही मर्ज

आरटीई नियमों के अनुसार बच्चों के लिए 1-3 किमी के दायरे में स्कूल होना अनिवार्य है लेकिन सरकार 5 किमी तक के स्कूलों का विलय कर रही है।
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1-3 किमी में स्कूल जरूरी, सरकार 5 किमी तक के स्कूल कर रही मर्ज

मध्य प्रदेश में सांदीपनि स्कूलों के नाम पर सरकारी स्कूलों के विलय को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं का हवाला देकर छोटे सरकारी स्कूलों को बंद कर बड़े सांदीपनि स्कूलों में मर्ज कर रहा है लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर राइट टू एजुकेशन (RTE) नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरटीई के तहत जहां 1 किमी में प्राथमिक और 3 किमी में माध्यमिक स्कूल जरूरी हैं वहीं कई जगह 5 किमी तक के सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं।

5 किमी तक के स्कूल हो रहे मर्ज

राजधानी भोपाल के पास बर्रई गांव इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां बने सांदीपनि स्कूल में आसपास के 1 से 4.5 किमी दूरी वाले पांच प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को मर्ज कर दिया गया है। प्रदेश में अब तक 274 सांदीपनि विद्यालयों में से 161 के भवन तैयार हो चुके हैं। इनमें से 97 स्कूल नए परिसरों में शिफ्ट किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 300 से अधिक छोटे सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज किया जा चुका है।

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क्या कहता है RTE कानून

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अनुसार:

  • कक्षा 1 से 5 तक का प्राथमिक स्कूल घर से 1 किमी के भीतर होना चाहिए
  • कक्षा 6 से 8 तक का माध्यमिक स्कूल 3 किमी के दायरे में होना जरूरी है

यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि छोटे बच्चे आसानी से स्कूल पहुंच सकें।

बस नहीं आई तो बच्चे कैसे जाएंगे

बर्रई के रापड़िया गांव का माध्यमिक स्कूल 4.5 किमी दूर सांदीपनि स्कूल में मर्ज किया गया है। यहां 58 छात्र दर्ज हैं और भवन भी अच्छी स्थिति में है। पैरेंट मनीष कुमार मीना का कहना है कि उनकी आय इतनी नहीं है कि रोज बच्चों के परिवहन का खर्च उठा सकें। अभी तक स्कूल बस की व्यवस्था भी शुरू नहीं हुई है। वहीं लहारपुर के प्राथमिक स्कूल को भी करीब 2 किमी दूर सांदीपनि स्कूल में मर्ज किया गया है। यहां 55 छात्र पढ़ते हैं। पैरेंट कमल विश्वकर्मा का कहना है कि बच्चों को बेहतर स्कूल मिलने की खुशी जरूर है लेकिन परिवहन व्यवस्था नहीं होने पर छोटे बच्चों को रोज इतनी दूर भेजना मुश्किल होगा।

15 साल में बंद हुए 49 हजार स्कूल

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में मध्यप्रदेश में करीब 49 हजार सरकारी स्कूल बंद या एकीकृत किए जा चुके हैं। विधानसभा के बजट सत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया था कि “एक शाला, एक परिसर” योजना के तहत 49,499 स्कूलों का एकीकरण किया गया है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा स्कूल मर्ज

जिला मर्ज किए गए स्कूल
छिंदवाड़ा 1525
बैतूल 1461
रीवा 1438
सागर 1423
पन्ना 1389
बालाघाट 1368
राजगढ़ 1338
विदिशा 1332
सांची 1296
भिंड 1227

हरदा का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

हरदा जिले में एक सरकारी स्कूल को 9 किमी दूर सांदीपनि स्कूल में शिफ्ट किए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है। पैरेंट्स का आरोप है कि इतनी दूरी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

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शिक्षक संगठन ने उठाए सवाल

राकेश दुबे का कहना है कि सांदीपनि स्कूलों की अवधारणा अच्छी हो सकती है लेकिन जिस तरह छोटे स्कूल बंद किए जा रहे हैं वह आरटीई नियमों के खिलाफ है। उनके मुताबिक प्रत्येक 1 किमी में प्राथमिक और 3 किमी में माध्यमिक स्कूल का प्रावधान अनिवार्य है।

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विभाग का जवाब- फिलहाल अपनी सुविधा से पहुंचें

लोक शिक्षण संचालनालय में सांदीपनि स्कूलों के संचालक प्रमोद सिंह ने कहा कि विभाग परिवहन सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तीन संभागों में अभी तक परिवहन के टेंडर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में फिलहाल छात्रों को अपनी सुविधा से स्कूल पहुंचना होगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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