Nawazuddin Siddiqui Birthday:'कभी-कभी लगता है अपुन ही भगवान है…' छोटे गांव से निकला लड़का, कैसे बना बॉलीवुड का सबसे दमदार अभिनेता

मुंबई। आज हिंदी सिनेमा के सबसे शानदार कलाकारों में गिने जाने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया, छोटे रोल निभाए, रिजेक्शन झेले और कई रातें मुश्किल हालात में बिताईं लेकिन अभिनय के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। यही वजह है कि आज नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को इंडस्ट्री का सबसे नेचुरल और दमदार अभिनेता माना जाता है। उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता नहीं बल्कि हर उस इंसान की उम्मीद है जो छोटे शहर से बड़े सपने लेकर निकलता है।
साधारण परिवार से निकलकर सपनों की दुनिया तक
नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुधाना कस्बे में हुआ था। उनका परिवार खेती से जुड़ा हुआ था और घर का माहौल बिल्कुल साधारण था। बड़े परिवार में पले-बढ़े नवाज बचपन से ही लोगों को ध्यान से देखा करते थे। गांव की छोटी छोटी बातें, लोगों की आदतें और बोलचाल का तरीका उनके दिमाग में बस जाता था। यही आदत आगे चलकर उनके अभिनय की सबसे बड़ी ताकत बनी। उनका बचपन किसी फिल्मी माहौल में नहीं बीता। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह लड़का एक दिन फिल्मों की दुनिया में इतना बड़ा नाम बन जाएगा लेकिन नवाज के अंदर कुछ अलग करने की चाह हमेशा थी।
पढ़ाई के बाद नौकरी, फिर अचानक बदल गई जिंदगी
नवाजुद्दीन ने हरिद्वार की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने वडोदरा में एक कंपनी में रसायन विशेषज्ञ के तौर पर नौकरी भी की। नौकरी अच्छी थी लेकिन उनका मन वहां नहीं लगता था। धीरे धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि वे सिर्फ नौकरी करने के लिए नहीं बने हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया। दिल्ली पहुंचने के बाद उनका थिएटर से जुड़ाव हुआ और यहीं से उनकी जिंदगी बदलनी शुरू हुई। थिएटर देखते देखते उन्हें अभिनय से प्यार हो गया। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियां सीखीं।
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मुंबई में भूख, संघर्ष और रिजेक्शन का दौर
अभिनेता बनने का सपना लेकर जब नवाज मुंबई पहुंचे तो असली संघर्ष शुरू हुआ। कई बार उनके पास किराया देने तक के पैसे नहीं होते थे। उन्हें छोटे कमरों में रहना पड़ा और कई दिनों तक मुश्किल हालात में जिंदगी गुजारनी पड़ी। संघर्ष के दिनों में उन्होंने चौकीदार की नौकरी भी की ताकि रोजमर्रा का खर्च चल सके। फिल्मों में उन्हें बहुत छोटे किरदार मिलते थे। कई बार तो दर्शक उन्हें पहचान भी नहीं पाते थे। उन्होंने 'सरफरोश', 'शूल' और 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए लेकिन उनके अंदर का कलाकार लगातार मेहनत करता रहा। उन्हें कई बार सिर्फ चेहरे और लुक्स की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया। लोगों ने साफ कहा कि वे हीरो जैसे नहीं दिखते लेकिन नवाज ने कभी हार नहीं मानी।
एक फिल्म जिसने बदल दी पूरी जिंदगी
नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में फैजल खान का किरदार मिला। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी। उनके अभिनय और संवाद बोलने के अंदाज ने लोगों का दिल जीत लिया। फिल्म का संवाद 'कभी कभी लगता है अपुन ही भगवान है' आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस किरदार के बाद बॉलीवुड ने पहली बार नवाजुद्दीन को गंभीरता से देखना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अलग किरदारों से बनाई अपनी पहचान
नवाजुद्दीन ने हमेशा ऐसे किरदार चुने जो बाकी कलाकारों से अलग थे। 'द लंचबॉक्स', 'मांझी', 'रमन राघव', 'मंटो', 'बदलापुर' और 'कहानी' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का अलग रंग दिखाया। वे उन कलाकारों में शामिल हैं जो किरदार को सिर्फ निभाते नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह जी लेते हैं। यही वजह है कि दर्शक उनके अभिनय से खुद को जोड़ लेते हैं। फिल्मों के अलावा वे वेब सीरीज की दुनिया में भी छा गए। 'सेक्रेड गेम्स' में उनका अभिनय लोगों को बेहद पसंद आया।
असफल फिल्मों के बाद भी कायम रही पहचान
हर अभिनेता के करियर में उतार चढ़ाव आते हैं और नवाज़ुद्दीन भी इससे अलग नहीं हैं। उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाईं। 'हीरोपंती 2', 'मोतीचूर चकनाचूर', 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' और 'टीकू वेड्स शेरू' जैसी फिल्मों को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली लेकिन खास बात यह रही कि इन फिल्मों में भी उनके अभिनय की तारीफ हुई। दर्शकों और समीक्षकों ने हमेशा माना कि नवाज अपने किरदार में पूरी ईमानदारी दिखाते हैं। यही वजह है कि असफल फिल्मों के बाद भी उनकी पहचान मजबूत बनी रही।
गाने और डायलॉग्स ने भी बनाया लोगों का पसंदीदा
नवाजुद्दीन की फिल्मों के कई गाने आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। 'जिया तू बिहार के लाला', 'बंजारा' और 'भर दो झोली' जैसे गाने लोगों को खूब पसंद आए। उनके डायलॉग्स भी सोशल मीडिया से लेकर आम जिंदगी तक खूब बोले जाते हैं। 'बाप का, दादा का, भाई का… सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल' जैसे संवाद आज भी लोगों को याद हैं। उनकी आवाज और संवाद बोलने का अंदाज उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है।
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परिवार, विवाद और निजी जिंदगी
अगर उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पत्नी का नाम अंजलि सिद्दीकी है। उनके दो बच्चे हैं और वे अपने परिवार के काफी करीब माने जाते हैं। हालांकि उनकी शादीशुदा जिंदगी कई बार विवादों में भी रही लेकिन नवाज हमेशा अपने बच्चों के साथ जुड़े रहे। उनकी बेटी शोरा सिद्दीकी अब अभिनय की ट्रेनिंग ले रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वे भी अभिनय की दुनिया में कदम रख सकती हैं।











