Narmada Pollution : नर्मदा में घुल रहा जहर, 34 नदियों व 43 नालों के साथ ही 9 शहरों का सीवेज बना बड़ा खतरा

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी लगातार बढ़ते प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के लिए किए गए प्रारंभिक सर्वे में सामने आया है कि नर्मदा में मिलने वाली 256 सहायक नदियों में से 34 नदियां और 43 बड़े नाले गंदा पानी एवं सीवेज लेकर नदी में मिल रहे हैं। इनमें इटारसी, हरदा, बड़वाह, सोहागपुर और पुनासा सहित 9 शहरों का सीवेज भी शामिल है, जो बिना उपचार के नर्मदा में पहुंच रहा है।
104 नदियां प्रदूषण मुक्त पर नर्मदा नहीं
अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के सर्वे के अनुसार 104 नदियां प्रदूषण मुक्त हैं, लेकिन सहायक नदियां और नाले ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की गंदगी नर्मदा तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार ने नर्मदा संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसके पहले चरण में 2,459 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें आईआईटी इंदौर तकनीकी सहयोग देगा।
27 जिलों में होगा काम
योजना के तहत नर्मदा किनारे बसे 27 जिलों के 54 शहरी और 818 ग्रामीण क्षेत्रों में काम होगा। नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन, कृषि, जल संसाधन, पर्यटन और धर्म एवं संस्कृति विभाग मिलकर नदी संरक्षण का कार्य करेंगे। शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), सीवेज नेटवर्क और गंदे नालों के डायवर्जन का काम किया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण, चेक डैम, स्टॉप डैम और बरसाती नालों के कटाव रोकने पर फोकस रहेगा।
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फैक्ट फाइल
- नर्मदा की सहायक नदियां 256
- प्रदूषण मुक्त नदिया 104
- गंदा पानी ला रहीं नदिया 34
- नर्मदा में मिलने वाले नाले 43
- प्रभावित जिले 27
- योजना में शहरी क्षेत्र 54
- योजना में ग्रामीण क्षेत्र 818
- प्रस्तावित बजट, करोड़ रु. 2,459
- सीवेज सिस्टम वाले शहर 9
- नर्मदा की मप्र में लंबाई, किमी 1077
- नर्मदा के कुल घाट 861
- शौचालय सुविधा वाले घाट 19.97%
- गंदगी पाए गए घाट 449
- रासायनिक खेती वाले घाट क्षेत्र 476
दम तोड़ रही 35 सहायक नदियां
सर्वे में सामने आया कि गौर, खारी और मंचंक सहित 35 सहायक नदियां बारिश के कुछ महीनों बाद सूख जाती हैं। इन्हें अविरल बनाए रखने के लिए अलग से जल संरक्षण योजना तैयार की जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इनके किनारों से अतिक्रमण हटाने और जल संरक्षण संरचनाएं विकसित करेगा।
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9 शहरों का बनेगा सीवेज सिस्टम
इटारसी, पुनासा हरदा, बड़वाह, सोहागपुर, पुनासा सहित 9 शहरों का सीवेज नालों के जरिए नर्मदा में मिल रहा है। इसे रोकने सीवेज सिस्टम और ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें इन शहरों में पूरे सिस्टम तैयार करने के लिए सरकार करीब 3 सौ करोड़ रुपए का प्लान तैयार किया है।
घाटों की स्थिति चिंताजनक
नर्मदा घाटों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई है। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन नीति विश्लेषण संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार अमरकंटक से गुजरात तक नर्मदा के 861 घाटों में से करीब 80 प्रतिशत घाटों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। केवल 19.97 प्रतिशत घाटों पर शौचालय उपलब्ध हैं। सर्वे के दौरान 449 घाटों पर भारी गंदगी पाई गई। श्रद्धालुओं द्वारा फेंका गया कचरा सीधे नदी में पहुंच रहा है।
रासायनिक खेती से प्रदूषण
रिपोर्ट के अनुसार रासायनिक खेती प्रदूषण का बड़ा कारण है। नर्मदा किनारे 720 घाटों के आसपास खेती होती है, जिनमें से 476 घाटों के आसपास रासायनिक खेती हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों से बहकर आने वाले रसायन नदी के जल को विषैला बना रहे हैं।
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विस्तृत कार्ययोजना बना रहे हैं
नर्मदा में दूषित पानी और कचरा रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सर्वे के आधार पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया जाएगा।
संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग












