PlayBreaking News

Public Bike Sharing Flop : नौ साल में हवा में 223 टन कार्बन मिलने से रोकने वालीं स्मार्ट साइकिलें हो रहीं कबाड़

राजधानी भोपाल में कभी पर्यावरण बचाने की मिसाल बनी पब्लिक बाइक शेयरिंग (पीबीएस) स्कीम ने शुरुआत से लेकर अंत तक यानी बीते 9 सालों में 2 लाख 23 हजार 380 किलोग्राम यानी लगभग 223 टन कार्बन डाई ऑक्साइड को हवा में मिलने से रोका, लेकिन अब यही स्मार्ट साइकिलें आईएसबीटी स्थित स्टोर में धूल खा रही हैं।
Follow on Google News
नौ साल में हवा में 223 टन कार्बन मिलने से रोकने वालीं स्मार्ट साइकिलें हो रहीं कबाड़

शाहिद खान, भोपाल। शहर में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई यह योजना ऑपरेटर कंपनी का एग्रीमेंट खत्म होने के बाद बंद पड़ी है। आईएसबीटी स्थित स्टोर में करोड़ों की साइकिलें कबाड़ हो रही हैं। राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 25 जून 2017 को पब्लिक बाइक शेयरिंग सर्विस शुरू की गई। शुरुआती दिनों में बाइक शेयरिंग सर्विस से हर दिन हर पांच मिनट में एक रजिस्ट्रेशन हुआ। यानी हर घंटे 12 लोग बाइक शेयरिंग सर्विस से जुड़े थे। इस सर्विस को ‘अर्बन एनवायरोमेंट’ तमगे से भी नवाजा गया।

40 हजार से ज्यादा थे स्मार्ट बाइक रजिस्ट्रेशन

स्मार्ट बाइक रजिस्ट्रेशन की बात करें तो आंकड़ा 40 हजार से भी ज्याद पहुंच चुका था। हालांकि मेंटेनेंस न होने से लोगों की दिलचस्पी कम जरूर हुई थी, लेकिन यह सुबह साइकलिंग करने वालों के साथ ही स्कूल-कॉलेज और कोचिंग जाने वाले स्टूडेंट्स की यह पहली पसंद थी।

हर दिन 68 किलो कार्बन हवा में मिलने के रोका 

शहर में 500 स्मार्ट साइकिलें और 55 डॉकिन स्टेशन बनाए गए थे। शुरुआत से ही लोगों ने इस सेवा को पसंद किया और बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए। स्मार्ट सिटी और ऑपरेटर कंपनी के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सिर्फ दो महीने में इन साइकिलों ने 19 हजार किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की थी। उस दौरान करीब 4243 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ था। यानी औसतन हर दिन लगभग 68 किलो कार्बन हवा में मिलने से रुका।

/img/89/1779120054499

फैक्ट फाइल 

  • एक दिन में : 68 किलो कार्बन उत्सर्जन कम हुआ
  •  एक महीने में : करीब 2 हजार किलो यानी 2 टन कार्बन कम हुआ
  •  एक साल में : लगभग 25 टन कार्बन हवा में घुलने से रुका
  •  9 साल में : करीब 223 टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ

यह असर हजारों पेड़ लगाने या लाखों किलोमीटर तक पेट्रोल वाहन कम चलाने जितना माना जा सकता है।

पब्लिक बाइक शेयरिंग पर एक नजर 

  • 25 जून 2017 को शुरुआत।
  • 55 डॉकिन स्टेशन बनाए थे।
  • 350 साइकिलों से शुरू हुई योजना 9 साल में 500 साइकिलों तक पहुंच गई।
  • 10 नवंबर 2025 को ऑपरेटर कंपनी का एग्रीमेंट खत्म हो गया।
  • एग्रीमेंट खत्म होने के बाद स्मार्ट सिटी कंपनी ने रिन्यूअल नहीं किया। 

ये भी पढ़ें: Twisha Sharma Bhopal Case : ट्विशा केस में फरार पति समर्थ सिंह पर 10 हजार का इनाम, पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू

पीएम कर रहे हैं ग्रीन ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील

दिलचस्प बात यह है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ई-व्हीकल और ग्रीन ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भोपाल में प्रदूषण कम करने वाली यह सफल योजना बंद पड़ी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब यह स्कीम पर्यावरण के लिए असरदार साबित हो चुकी थी, तो इसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया?

स्मार्ट सिटी को सौंप दी साइकिलें और डाकिन यार्ड 

नाम नहीं छापने की शर्त पर चार्टर्ड कंपनी कर्मचारी ने बताया कि पब्लिक बाइक शेयरिंग सर्विस प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी कंपनी का है। चार्टर्ड वेंडर कंपनी है, जिसका करार 10 नवंबर 2025 को खत्म हो गया है। जिसे दोबारा रिन्यू नहीं किया गया। चार्टर्ड ने सभी साइकिलें और स्टैंड स्मार्ट सिटी को सौंप दिए हैं। इधर, इस मामले में स्मार्ट सिटी कंपनी सीएमडी अंजू अरुण कुमार से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

ये भी पढ़ें: Indian Bullet Train : देश की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक आई सामने, रेल मंत्रालय मे लगाई तस्वीर

यूजर्स के वर्जन 

“मैं रोज स्मार्ट साइकिल से कॉलेज जाता था। बस का इंतजार नहीं करना पड़ता था और किराया भी बचता था। पिछले छह-सात महीने से साइकिलें गायब हैं। अब या तो लेट होता हूं या ऑटो में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। स्मार्ट सिटी ने बिना बताए सेवा बंद कर दी।”

रवि शर्मा, स्टूडेंट

“सुबह 6 बजे कोचिंग के लिए निकलती हूं। साइकिल सबसे सुरक्षित और सस्ता साधन था। अब रोज पापा छोड़ने आते हैं या ऑटो करना पड़ता है।”

 निशा वर्मा, स्टूडेंट

“मैं फिटनेस के लिए रोज सुबह साइकिल चलाता था। स्मार्ट सिटी की इस सुविधा की वजह से आदत बनी थी। अचानक एक दिन स्टैंड खाली मिला। न नोटिस, न सूचना। ऐसा लगता है जैसे यूजर्स की कोई अहमियत ही नहीं।” 

अमित खान, मॉर्निंग साइक्लिस्ट

“ऑफिस जाने में स्मार्ट साइकिल सबसे भरोसेमंद थी। पार्किंग की टेंशन नहीं, खर्च भी कम। अब दो महीने से पूरी व्यवस्था ठप है। स्मार्ट सिटी का स्मार्टपन सिर्फ फाइलों और पोस्टरों तक रह गया है।”

पंकज पटेल, निजी कंपनी कर्मचारी

दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है

पब्लिक बाइक शेयरिंग सर्विस को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। सिस्टम के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर काम किया जा रहा है। 

नितिन दवे, पीआरओ, स्मार्ट सिटी

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts