बीमारी छिपाकर शादी करना पड़ा भारी:भोपाल फैमिली कोर्ट ने 3 मामलों में दिए ज्यूडिशियल सेपरेशन के आदेश

पल्लवी वाघेला, भोपाल। फैमिली कोर्ट में पिछले 22 दिनों के भीतर ऐसे तीन मामलों में फैसले सामने आए हैं जिनमें पत्नियों पर शादी से पहले अपनी गंभीर बीमारियां छिपाने के आरोप लगे। कोर्ट ने मामलों की सुनवाई के बाद ज्यूडिशियल सेपरेशन के आदेश देते हुए कहा कि शादी से पहले गंभीर बीमारी छिपाना जीवनसाथी और उसके परिवार के साथ क्रूरता और धोखे की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने यह भी माना कि शादी के बाद बीमारी का जिम्मेदार ससुराल पक्ष को ठहराना और गलत आरोप लगाना स्वीकार्य नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तीनों मामलों में फैसला पति पक्ष के समर्थन में आया।
केस-1: सास ने प्रसाद में धीमा जहर दिया
पहले मामले में करोंद निवासी महिला के पति ने तलाक की याचिका दायर की थी। पति ने बताया कि 2022 में दोनों की अरेंज मैरिज हुई थी। शादी के करीब तीन महीने बाद पत्नी को मिर्गी के दौरे पड़ने लगे। जब पति ने इस बारे में ससुराल पक्ष से बात की तो शुरुआत में इसे शादी के तनाव का असर बताया गया लेकिन बाद में महिला की मेडिकल हिस्ट्री सामने आई। पति का आरोप था कि शादी से पहले बीमारी की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई। वहीं पत्नी ने कोर्ट में आरोप लगाया कि वह शादी से पहले पूरी तरह स्वस्थ थी और उसकी सास ने प्रसाद के नाम पर उसे धीमा जहर दिया जिससे उसकी हालत खराब हुई।
केस-2: रेयर बीमारी से जा रही थी आंखों की रोशनी
दूसरे मामले में इटारसी की रहने वाली महिला की शादी भोपाल मूल के एक एनआरआई युवक से हुई थी। पति ने भोपाल फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका लगाई। पति के मुताबिक पत्नी को विदेश ले जाने की प्रक्रिया के दौरान पता चला कि वह एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है जिसके कारण धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी खत्म हो सकती है। पति का आरोप था कि पत्नी और उसके परिवार ने बीमारी और इलाज की जानकारी शादी से पहले छिपाई। इसी वजह से पत्नी को वीजा भी नहीं मिल पाया। महिला ने इसे पति की साजिश बताते हुए करोड़ों रुपए की एलिमनी की मांग की लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और एक्सपर्ट गवाही के बाद कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया।
केस-3: गर्भाशय की समस्या और बार-बार गर्भपात
तीसरे मामले में महिला को गर्भाशय संबंधी गंभीर समस्या थी जिसके कारण बार-बार गर्भपात हो रहा था। पति को बाद में जानकारी मिली कि पत्नी और उसके परिवार को पहले से इस बीमारी और मां बनने में आने वाली जटिलताओं की जानकारी थी लेकिन शादी से पहले इसे छिपाया गया। पत्नी ने कोर्ट में दावा किया कि इलाज संभव है, जबकि विशेषज्ञों ने बताया कि इलाज लंबा, जटिल और बेहद खर्चीला है तथा सफल गर्भधारण की गारंटी भी नहीं है। महिला ने सास और ननद पर गर्भपात कराने जैसे आरोप भी लगाए लेकिन कोर्ट ने सभी तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पति के पक्ष में ज्यूडिशियल सेपरेशन के आदेश दिए।
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सच छिपाना भी धोखा
मामलों में पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा कि विवाह से पहले परिवार एक-दूसरे के बारे में जरूरी जानकारी लेकर ही रिश्ता तय करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जीवनसाथी की गंभीर बीमारी की जानकारी पहले से होती तो संभव है कि विवाह ही न होता। ऐसे मामलों में बीमारी छिपाना एक तरह का धोखा माना जाता है। उन्होंने बताया कि यदि शादी के बाद बीमारी होती है तो पति की जिम्मेदारी पत्नी का साथ निभाने की होती है, लेकिन इन मामलों में बीमारी की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई थी। हिन्दू मैरिज एक्ट में ऐसे मामलों को लेकर अलग-अलग कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।












