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नागपुर में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का शताब्दी समारोह और विजयादशमी उत्सव भव्य रूप से आयोजित हुआ। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई दिग्गज शामिल हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली से स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया और संघ के योगदान को नमन किया।
मोहन भागवत ने अपने 41 मिनट के भाषण में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकियों ने वहां धर्म पूछकर हिंदुओं की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि हमारी सेना और सरकार ने इस हमले का सटीक जवाब दिया। इस घटना ने हमें दोस्त और दुश्मन को पहचानने का सबक दिया। भागवत ने कहा कि हम सभी के साथ मित्रता का भाव रखते हैं और आगे भी रखेंगे, लेकिन हमें अपनी सुरक्षा के प्रति और ज्यादा सजग रहना होगा।
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है और यही हमारी असली ताकत है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज इन विविधताओं को भेदभाव में बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को एकजुट रहना चाहिए और शासन-प्रशासन को बिना पक्षपात काम करना होगा। युवाओं से उन्होंने अपील की कि छोटी-छोटी बातों पर सड़कों पर उतरकर अराजकता फैलाने से बचें।
भागवत ने कहा कि आदत बदले बिना बदलाव नहीं आता। उन्होंने कहा कि अगर हमें आदर्श भारत चाहिए तो हमें खुद भी आदर्श बनना होगा। उन्होंने बताया कि संघ हमेशा राजनीति से दूर रहा है और शाखा व्यवस्था के जरिए समाज निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है।
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया आज उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है और भारत से उम्मीद कर रही है कि वह इसका हल निकालेगा। उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया को धर्म और विकास का संतुलित मार्ग दिखा सकता है।
भागवत ने अमेरिका की नई टैरिफ नीति पर चिंता जताई और कहा कि भारत को आत्मनिर्भर होना होगा, ताकि किसी पर आर्थिक रूप से निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने नेपाल में हाल ही में हुई हिंसा पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि लोकतांत्रिक बदलाव सही रास्ता है, हिंसक आंदोलन केवल अराजकता को जन्म देते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संघ की तुलना "पवित्र वटवृक्ष" से की और कहा कि यह भारत की जनता को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने डॉ. हेडगेवार और डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि नागपुर की यह भूमि महान विभूतियों की स्मृतियों से जुड़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता नहीं दिखाई, चाहे उन पर प्रतिबंध लगे हों या साजिशें रची गई हों। उन्होंने कहा कि आज घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव देश के सामने बड़ी चुनौती हैं, जिनसे निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को सजग रहना होगा।
शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ ने देशभर में कई कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, जन गोष्ठियां, हिंदू सम्मेलन, सद्भाव बैठकें और युवा सम्मेलन शामिल हैं। साथ ही शाखाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन नागपुर में केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। 1926 में संघ का नाम तय हुआ और शाखा प्रणाली शुरू हुई। 1930 में डॉ. हेडगेवार गांधीजी के आंदोलन में शामिल होकर जेल गए। 1931 में पहली बार संघ की ड्रेस (खाकी नेकर और टोपी) तय की गई। 1939 में हेडगेवार का निधन हुआ और माधवराव गोलवलकर नए सरसंघचालक बने।
1947 में देश की आजादी के बाद संघ का तेजी से विस्तार हुआ। 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा और गोलवलकर जेल गए। 1949 में संघ से बैन हटा और संविधान व लोकतंत्र के प्रति निष्ठा की घोषणा की गई। 1951 में संघ से प्रेरित होकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की। 1966 में हिंदू समाज को जोड़ने के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) की स्थापना हुई।
1975-77 में इमरजेंसी के दौरान संघ पर बैन लगा और हजारों स्वयंसेवक गिरफ्तार हुए। 1980 में जनसंघ को खत्म कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनी। 1984-1992 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान संघ और बीजेपी का विस्तार हुआ। 1998-2004 में पहली बार संघ से जुड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और संघ परिवार का राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव बढ़ा।
2015 में संघ ने अपने 90 साल पूरे किए। आज संघ की शाखाएं दुनिया के 39 देशों में 'हिंदू स्वयंसेवक संघ' के नाम से फैली हैं। 2020-2023 में संघ ने कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्य किए। 2025 में 2 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन संघ 100 साल का शताब्दी समारोह मना रहा है।