RSS प्रमुख भागवत बोले- हिंदू समाज में एकजुटता की कमी, संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं थी

नई दिल्ली। देश में वैचारिक और सामाजिक एकता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की स्थापना और उसके मूल उद्देश्यों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने RSS की स्थापना देश को गुलामी से मुक्त कराने और समाज में फैली विभाजन की भावना को खत्म करने के लिए की थी।
भागवत का संदेश- एकता की कमी बनी गुलामी की वजह
भागवत ने यह बातें शनिवार को निजामाबाद जिले के कुंडाकुर्थी गांव में कही है। उन्होंने आगे कहा कि हेडगेवार का मानना था कि भारतीय समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी का कारण बनी। उन्होंने बताया कि हेडगेवार ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ राजनीतिक और सशस्त्र दोनों स्तरों पर संघर्ष के रास्ते तलाशे थे।
भागवत के मुताबिक, आजादी की लड़ाई के दौरान हेडगेवार को यह समझ आया कि भारत पर शासन करने वाले अंग्रेज पहले विदेशी शासक नहीं थे, बल्कि उससे पहले भी देश बाहरी ताकतों के अधीन रहा है।
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कंडाकुर्थी में कार्यक्रम, पैतृक गांव से जुड़ा भावनात्मक संबंध
संघ प्रमुख ने यह बातें कंडाकुर्थी गांव में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन के बाद कहीं। यह गांव हेडगेवार का पैतृक स्थान है।
उन्होंने कहा कि समाज के भीतर मौजूद कमियों को दूर करना जरूरी है, क्योंकि यही कमजोरियां देश को बार-बार हार की ओर ले जाती रही हैं।
भागवत ने स्पीच में कही 4 बड़ी बातें…
- हिंदुत्व की परिभाषा: भागवत ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब सभी के साथ मिलकर रहना, अपने रास्ते पर चलना और दूसरों का सम्मान करना है।
- हेडगेवार का विजन: हेडगेवार चाहते थे कि हिंदू समाज मजबूत, निडर और चरित्रवान बने।
- RSS का उद्देश्य: संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए की गई थी।
- संगठन की भूमिका: आज भी स्वयंसेवक उसी दिशा में काम कर रहे हैं और समाज को मजबूत बना रहे हैं।
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संगठन और विचारधारा पर जोर
भागवत ने कहा कि RSS की शाखाओं और प्रार्थना के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकता और सेवा की भावना विकसित की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कंडाकुर्थी में बना स्फूर्ति केंद्र देश सेवा के लिए नई प्रेरणा देगा।
मोहन भागवत के पिछले 2 बड़े बयान…
- 19 मार्च: नागपुर में बोले- RSS को 86 संभागों में बांटेंगे
मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए इसे बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। - 8 फरवरी: मुंबई में बोले- संघ कहे तो पद छोड़ दूंगा
भागवत ने कहा था कि अगर संगठन उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में 75 साल की उम्र के बाद पद छोड़ने की परंपरा पर चर्चा होती रही है।
इस बयान के बाद एक बार फिर RSS की विचारधारा, उसके उद्देश्य और वर्तमान भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।



















