तलाक के बाद फिर एक हुए रिश्ते:अलगाव ने सिखाई साथ की अहमियत, 5 साल में 182 दंपतियों ने दोबारा थामा एक-दूसरे का हाथ

पल्लवी वाघेला, भोपाल। छोटी-छोटी बातों से शुरू हुए विवाद, बढ़ते झगड़े और फिर तलाक का फैसला। फैमिली कोर्ट में पहुंचने वाले कई मामलों की कहानी अक्सर ऐसी ही होती है। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो कानूनी तौर पर खत्म होने के बाद भी दिलों में जिंदा रहते हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान 182 ऐसे मामले सामने आए जिनमें तलाक लेने के बाद पति-पत्नी ने अपनी गलतियों और रिश्ते की अहमियत को समझा और फिर से एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया। साल 2021 से 2025 के बीच प्रदेश के विभिन्न फैमिली कोर्ट में ऐसे मामलों की संख्या लगातार सामने आई है जहां दंपतियों ने तलाक की डिक्री निरस्त कराने के लिए आवेदन दिया और दोबारा विवाह बंधन में बंध गए। विशेषज्ञों का मानना है कि अलगाव के बाद कई लोगों को एहसास हुआ कि उनकी समस्याएं स्थायी नहीं थीं बल्कि परिस्थितियों और गलतफहमियों का परिणाम थीं।
कोविड के बाद बढ़े रिश्तों को दूसरा मौका देने के मामले
फैमिली कोर्ट से जुड़े आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी के बाद ऐसे मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। कोविड काल ने लोगों को रिश्तों की अहमियत समझाई और कई दंपतियों ने पुराने मतभेद भुलाकर फिर साथ आने का निर्णय लिया।
भोपाल में पांच वर्षों के आंकड़े
- 2021 : 2 मामले
- 2022 : 8 मामले
- 2023 : 15 मामले
- 2024 : 7 मामले
- 2025 : 9 मामले
वर्ष 2025 में प्रमुख शहरों की स्थिति
- भोपाल : 9 मामले
- इंदौर : 5 मामले
- ग्वालियर : 5 मामले
- जबलपुर : 7 मामले
ये वे मामले हैं जिनमें तलाक की डिक्री रद्द कराने और दोबारा विवाह के लिए आवेदन किए गए।
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बीमारी और संकट ने फिर जोड़ा रिश्ता
भोपाल के एक दंपति ने वर्ष 2018 में तलाक ले लिया था। कोरोना काल के दौरान पति आर्थिक संकट में घिर गया और तनाव के चलते उसे हार्ट अटैक आ गया। इस कठिन समय में पूर्व पत्नी लगातार उसके साथ खड़ी रही। दोनों को एहसास हुआ कि उनके बीच का भावनात्मक रिश्ता अभी भी कायम है। आखिरकार उन्होंने जनवरी 2025 में दोबारा शादी कर ली।
बेटी की खुशी के लिए फिर साथ आए
ग्वालियर के एक दंपति ने तलाक के बाद अलग-अलग रिश्तों की तलाश की लेकिन उन्हें अपना पुराना रिश्ता ही बेहतर लगा। इस बीच उनकी बेटी में अवसाद के लक्षण दिखाई देने लगे। बेटी के भविष्य और परिवार को फिर से जोड़ने के उद्देश्य से दोनों ने मतभेद भुलाकर दो साल बाद पुनर्विवाह कर लिया।
जल्दबाजी का फैसला पड़ा भारी
इंदौर की एक महिला ने परिवार के दबाव में आकर तलाक ले लिया था। बाद में उसे महसूस हुआ कि उसने जल्दबाजी में गलत फैसला लिया। मायके में भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बाद उसने अपने पूर्व पति से दोबारा संपर्क किया और दोनों ने रिश्ते को दूसरा मौका देने का निर्णय लिया। इंदौर का ही एक और मामला भी दिलचस्प रहा। तलाक के बाद दोनों अलग-अलग पहचान के साथ एक डेटिंग प्लेटफॉर्म पर मिले। बातचीत बढ़ी और जब आमने-सामने आए तो दोनों ने महसूस किया कि उनके बीच का जुड़ाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने फिर साथ रहने का फैसला किया।
क्यों लौट रहे हैं पुराने रिश्तों में?
विशेषज्ञों के अनुसार तलाक के बाद दोबारा साथ आने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आते हैं। कई दंपतियों को एहसास होता है कि उन्होंने गुस्से, अहंकार या जल्दबाजी में निर्णय लिया था। कुछ मामलों में बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी वजह बनता है। कई बार दोस्तों, रिश्तेदारों या बाहरी लोगों की सलाह पर लिए गए फैसलों पर बाद में पछतावा होता है। इसके अलावा गलतफहमियों का दूर होना, काउंसलिंग के बाद सोच में बदलाव, आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं का समाधान, भावनात्मक जुड़ाव का बरकरार रहना और नए रिश्तों में पुराने साथी की अहमियत समझ आना भी बड़ी वजहें बन रही हैं।
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दूसरी बार रिश्ते ज्यादा मजबूत साबित होते हैं
काउंसलर शैल अवस्थी के अनुसार कई बार पति-पत्नी अलग होने के बाद समझ पाते हैं कि उनकी समस्या असल में रिश्ते से नहीं बल्कि परिस्थितियों से जुड़ी थी। जब वे दोबारा साथ आते हैं तो पहले की गलतियों से सीख चुके होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में दूसरी बार बना रिश्ता पहले की तुलना में ज्यादा परिपक्व, मजबूत और स्थायी साबित होता है।












