PU Special :आंखो देखी-इंदौर के कैलाश-मानसरोवर यात्री ओम द्विवेदी ने बताया, 'पहाड़ से मौत तो तब भी गिर रही थी, जब हम लौटे थे'

इंदौर के कैलाश-मानसरोवर यात्री ओम द्विवेदी ने अपनी यात्रा के दौरान नेपाल का अनुभव पीपुल्स समाचार के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि तिब्बत-नेपाल सीमा पर प्रकृति के खतरनाक स्वरूप को देखा जा चुका था। उन्होंने यात्रा के दौरान जो देखा, पढ़िए उनके ही शब्दों में-
ऊपर से गिर रहे पत्थर की दिशा बदली तब जान में जान आई
‘मुश्किलें तो तब भी थीं, जब हम लौटे थे। पहाड़ गिर रहे थे और कुछ किमी तक की सड़क ध्वस्त हो गई थी। उस इलाके को पार करते हुए एक पत्थर मेरी ओर भी गिरा था। मेरे 23 साथियों की सांसें थम-सी गई थीं। ऊपर से गिरते पत्थर की दिशा बदली और वह नीचे नदी में चला गया। जान में जान आई। हमने वह हिस्सा पार किया। तीन दिन बाद तबाही का जो मंजर है, उसके बारे में सोचकर ही दिल बैठ जाता है। जिन जगहों पर रहकर अभी-अभी हम आए हैं, उन्हीं जगहों पर रहते हुए हमारी ही तरह के कितने लोग सैलाब में बह गए होंगे। कितनी ही जिंदगियों ने मौत का लिबास पहन लिया होगा। कैलाश दर्शन की स्मृतियों में विनाश के यह किस्से हमेशा ही सिसकियां बनकर दर्ज रहेंगे। अब जब हम सुरक्षित हैं, नेपाली गाइड की हिदायत बार-बार याद आती है-“पहाड़ गिर रहा है, पत्थर मौत की शक्ल में नीचे आ रहे हैं, एक-एककर यहां से आगे बढ़ें,रुके तो कुछ भी हो सकता है।’
ओम द्विवेदी, कैलाश-मानसरोवर यात्री
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