1.5 करोड़ की घूस का खेल पड़ा भारी! CGST के 2 अफसर गिरफ्तार, कार्रवाई के बाद अदालत में पलटा मामला

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में रिश्वतखोरी के मामले में CBI की कार्रवाई के बाद मामला अदालत पहुंचते ही नया मोड़ ले गया। एजेंसी ने CGST के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कंथेती, अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और नरेंद्र राजपूत को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि एक पत्थर खनन फर्म से जुड़े GST और रॉयल्टी विवाद को निपटाने के बदले 1.50 करोड़ रुपये मांगे गए थे। CBI ने नरेंद्र राजपूत को 40 लाख रुपये लेते हुए पकड़े जाने का दावा किया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया। हालांकि, ठाणे की अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को कानून के अनुरूप नहीं माना।
40 लाख लेते पकड़ा गया आरोपी
CBI के अनुसार, मामले की शुरुआत 26 अगस्त को दर्ज शिकायत और केस से हुई। आरोप था कि CGST विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने पत्थर की खदान वाली फर्म के GST और रॉयल्टी मामले को निपटाने के लिए बड़ी रकम मांगी थी। जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी ने कार्रवाई की और नरेंद्र राजपूत को 40 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया।
दो CGST अधिकारियों पर भी कार्रवाई
राजपूत की गिरफ्तारी के बाद CBI ने CGST के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कंथेती और अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा को भी हिरासत में लिया। एजेंसी के मुताबिक, दोनों अधिकारियों की रिश्वत मामले में भूमिका सामने आई थी। CBI ने इसके बाद आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण मिलने की बात सामने आई।
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तलाशी में नकदी और गहने बरामद
CBI का कहना है कि आरोपियों के ठिकानों से करीब 43 लाख रुपये नकद और लगभग 90 लाख रुपये के आभूषण बरामद किए गए। एजेंसी ने इसे जांच का अहम हिस्सा माना। वहीं, अदालत में आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए CBI ने मामले की आगे जांच के लिए पूछताछ जरूरी बताई।
अदालत ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान ठाणे की अदालत ने CBI की कार्रवाई को लेकर अहम टिप्पणी की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमएस लोने ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुसार नहीं की गई। अदालत ने जांच अधिकारी की ओर से पेश केस डायरी के दस्तावेजों को लेकर भी आपत्ति जताई।
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तीनों आरोपियों को मिली रिहाई
अदालत ने CBI की हिरासत में पूछताछ की मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि कथित रिश्वत की रकम पहले ही बरामद की जा चुकी है, इसलिए आरोपियों को हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं दिखता। इसके बाद तीनों आरोपियों को 15-15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया।



















