PU Special :बच्ची को गोद लेने के 6 महीने बाद पति ने झाड़ा पल्ला, कोर्ट का आदेश; देना होगा 15 हजार भरण-पोषण

पल्लवी वाघेला, भोपाल। आमतौर पर माता-पिता के विवाद में अभिभावक कोर्ट में बच्चे की कस्टडी के लिए लड़ते हैं, लेकिन अब ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें उनके झगड़े का कारण बच्चे की परवरिश है। अकेले भोपाल फैमिली कोर्ट में बीते साल जुलाई से अब तक ऐसे चार मामले पहुंचे हैं। वहीं प्रदेश के विभिन्न जिलों की कोर्ट में करीब दो दर्जन मामले विचाराधीन हैं, जिनमें बच्चों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दंपति का रिश्ता तलाक तक जा पहुंचा। कुछ मामलों में बच्चों की बीमारी तो कुछ में शक के चलते माता-पिता में से एक या दोनों ही बच्चे की जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा असर बच्चों की भावनात्मक स्थिति पर पड़ता है।
बच्चा गोद लेने के बाद बदला पति का रवैया
रोहित नगर निवासी दंपती को शादी के आठ साल बाद भी संतान न होने पर दंपती ने चेकअप कराया। पत्नी का कहना है कि जांच में सामने आया कि पति संतान उत्पत्ति के लिए मेडिकली अनफिट है। इसके बाद उसने बच्चा गोद लेने का प्रस्ताव रखा, लेकिन पति तैयार नहीं हुए। बाद में रिश्ता टूटने और शायद अपनी मेडिकल कंडीशन के कारण सामाजिक दबाव में आकर वह बच्चा गोद लेने के लिए तैयार हो गए। साल 2023 में उन्होंने एक नवजात बच्ची को उसके माता-पिता के द्वारा कानूनी प्रक्रिया से गोद लिया।
ये भी पढ़ें: बेटमा में तीन सगी बहनों की मौत का रहस्य गहराया, बिसरा रिपोर्ट पर टिकी जांच
छह महीने बाद कहा-दूसरे की बच्ची पर पैसा खर्च नहीं करूंगा
पत्नी का कहना है कि बच्ची को गोद लेने के करीब छह माह बाद ही पति का रवैया बदलने लगा। उसने कहा कि दूसरे की बच्ची पर पैसा खर्च नहीं करेगा और वह इस अनजान बच्ची का पालन-पोषण नहीं कर सकता। विवाद बढ़ा तो पत्नी भोपाल में ही अपने ससुराल के बंद पड़े पैतृक घर में रहने चली गई। इसे लेकर भी सास और पति ने उसे परेशान किया और कानूनी नोटिस देने की धमकी दी। इसके बाद पत्नी ने भरण-पोषण का केस लगाया।
कोर्ट ने पत्नी और बच्ची के लिए 15 हजार रुपए तय किए
मामले में फिलहाल कोर्ट ने पत्नी और बच्ची को भरण-पोषण दिए जाने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने पत्नी को 10 हजार रुपए और बच्ची के लिए 5 हजार रुपए, इस तरह कुल 15 हजार रुपए भरण-पोषण के आदेश दिए हैं। विवाद के बीच पति ने तलाक का केस भी लगा दिया। संतान को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद तलाक की स्थिति तक पहुंच रहे हैं और प्रदेश में ऐसे करीब दो दर्जन मामले विचाराधीन बताए जा रहे हैं।
बच्चों की परवरिश बनी रिश्ते टूटने की वजह
कुछ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता के विवाद का मूल कारण बच्चे हैं। भोपाल में स्पेशल चाइल्ड की परवरिश को लेकर भी दंपती कोर्ट पहुंचे थे और दोनों बेटी को रखना नहीं चाहते थे, हालांकि वर्तमान में परिवार साथ है। इसी तरह इंदौर में थैलेसीमिया पीड़ित बेटे की जिम्मेदारी से पिता ने यह कहकर इंकार कर दिया कि यह बीमारी पत्नी की देन है तो पत्नी ही इसे झेले। फैमिली कोर्ट काउंसलर शैल अवस्थी ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है और इसमें बच्चों की भावनात्मक स्थिति सबसे अधिक बिगड़ती है। ऐसे में प्रयास रहता है कि जल्द से जल्द मामले में समझौता कराने का प्रयास हो।




















