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डिजिटल दुनिया में गैंगस्टर्स :विदेश से सोशल मीडिया के जरिए कैसे ऑपरेट हो रहा है क्राइम नेटवर्क?

विदेश में बैठे गैंगस्टर इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भारत में अपराध चला रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने 10 बड़े अपराधियों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की है। जानिए कैसे काम करता है यह डिजिटल क्राइम नेटवर्क।
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विदेश से सोशल मीडिया के जरिए कैसे ऑपरेट हो रहा है क्राइम नेटवर्क?
इन 10 आरोपियों में से तीन दिल्ली, दो पंजाब, चार हरियाणा और एक राजस्थान से हैं

देश में अपराध की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले गैंगस्टर फोन कॉल, रंगदारी और अपने स्थानीय नेटवर्क के जरिए काम करते थे, लेकिन अब अपराध का पूरा सिस्टम डिजिटल हो चुका है। इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए विदेश में बैठे गैंगस्टर भारत में हत्या, रंगदारी, धमकी और गैंगवार जैसी वारदातों को ऑपरेट कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की हालिया कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। दिल्ली पुलिस ने विदेश में बैठे 10 बड़े अपराधियों और गैंगस्टर्स के पासपोर्ट रद्द करने के लिए विदेश मंत्रालय से सिफारिश की है। पुलिस का मानना है कि इन अपराधियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही रोककर उन्हें कानून के दायरे में लाना आसान हो सकता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक ये गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और दुबई जैसे देशों में बैठकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में अपना नेटवर्क चला रहे हैं।

विदेश से कैसे चलता है पूरा गैंग नेटवर्क?

जांच एजेंसियों के मुताबिक अब गैंगस्टर्स सीधे फोन कॉल या आम बातचीत से बचते हैं। वे टेलीग्राम, सिग्नल और दूसरे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जहां चैट और कॉल आसानी से ट्रैक नहीं हो पाती। इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर गैंग के नाम से पोस्ट डाले जाते हैं और कई बार हत्या या फायरिंग की जिम्मेदारी भी सोशल मीडिया पर ली जाती है। विदेश में बैठे अपराधी भारत में अपने गुर्गों को ऑनलाइन निर्देश देते हैं। हवाला नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसों का लेनदेन किया जाता है। पुलिस का कहना है कि अब गैंग ऑपरेशन पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर आधारित हो चुका है।

दिल्ली पुलिस की लिस्ट में कौन-कौन?

दिल्ली पुलिस ने जिन 10 अपराधियों के पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है, उनमें कई बड़े गैंगस्टर्स और आतंकी नेटवर्क से जुड़े नाम शामिल हैं। इनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े कई चेहरे भी बताए जा रहे हैं। इस सूची में पंजाब के अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला का नाम सबसे चर्चित है। अर्श डल्ला पर हत्या, आतंकवादी गतिविधियों और जबरन वसूली समेत 50 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह कनाडा में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहा है। भारत सरकार पहले ही उसे व्यक्तिगत आतंकी घोषित कर चुकी है।

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हिमांशु भाऊ और कपिल सांगवान पर कई राज्यों में केस

हरियाणा के रोहतक का रहने वाला हिमांशु भाऊ भी इस सूची में शामिल है। पुलिस के मुताबिक वह पहले भारत से पुर्तगाल भागा और फिर अमेरिका पहुंच गया। उस पर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कई शूटआउट और रंगदारी के मामलों को ऑपरेट करने का आरोप है। दिल्ली के चर्चित बर्गर किंग मर्डर केस में भी उसका नाम सामने आया था। इसी तरह दिल्ली के कपिल सांगवान उर्फ नंदू पर हत्या, जमीन कब्जाने और गैंगवार से जुड़े कई आरोप हैं। पुलिस के अनुसार वह 2020 में ब्रिटेन भाग गया था। उस पर आईएनएलडी नेता नफे सिंह राठी हत्याकांड से जुड़े आरोप भी लगे हैं।

रोहित गोदारा से लेकर राशिद केबलवाला तक कई बड़े नाम शामिल

राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला रोहित गोदारा भी दिल्ली पुलिस की सूची में शामिल है। वह लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ नेटवर्क के करीबी के रूप में जाना जाता है। पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा करणी सेना नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड और सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग मामले में भी जांच एजेंसियों ने उसका नाम जोड़ा है। दिल्ली का राशिद केबलवाला भी दुबई में बैठकर नेटवर्क ऑपरेट करने का आरोपी है। पुलिस का दावा है कि उसका संबंध हाशिम बाबा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से है। वह लगातार दुबई, थाईलैंड और बाली के बीच लोकेशन बदलता रहता है।

सोशल मीडिया पर बन रहा गैंगस्टर्स का डर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया अब गैंगस्टर्स के लिए सिर्फ संपर्क का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह डर और दबदबा बनाने का हथियार बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स, हथियारों के साथ तस्वीरें, धमकी भरे पोस्ट और गानों के जरिए अपराधियों की छवि बनाई जा रही है। युवा वर्ग को प्रभावित करने के लिए लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाई जाती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कई युवा सोशल मीडिया के जरिए ही इन गैंग्स के संपर्क में आते हैं और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में खींचे चले जाते हैं।

पासपोर्ट रद्द करने से क्या होगा असर?

दिल्ली पुलिस का मानना है कि अगर इन अपराधियों के पासपोर्ट रद्द हो जाते हैं, तो उनकी अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सीमित हो जाएगी। इससे उनके लिए देश बदलना मुश्किल होगा और प्रत्यर्पण प्रक्रिया आसान हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों की कोशिश है कि इन अपराधियों को उन देशों तक सीमित कर दिया जाए जहां वे अभी मौजूद हैं। इससे इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के जरिए कार्रवाई तेज करने में मदद मिल सकती है।

अपराध की दुनिया में डिजिटल खतरा बढ़ा

भारत में अपराध का चेहरा अब तेजी से बदल रहा है। पहले जहां गैंगवार सड़कों तक सीमित थी, अब वही लड़ाई सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है। विदेश में बैठे अपराधी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं। 

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  • गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में साइबर फ्रॉड से जुड़े सबसे ज्यादा शिकायतें व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम से आईं। सिर्फ व्हाट्सऐप से जुड़े साइबर फ्रॉड की 43,797 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि टेलीग्राम से 22,680 और इंस्टाग्राम से 19,800 शिकायतें मिलीं।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद की एक समिति को बताया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अब तक 805 मोबाइल ऐप और 3,266 वेबसाइट लिंक ब्लॉक किए जा चुके हैं।
  • इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के अनुसार 19 लाख से ज्यादा “म्यूल अकाउंट” पकड़े गए हैं और करीब 2,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोके गए
  • दिल्ली पुलिस और दूसरी एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि कई गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, यूके और दुबई से इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और एन्क्रिपेड ऐप्स के जरिए भारत में रंगदारी, शूटआउट और गैंग ऑपरेशन चला रहे हैं।
  • पंजाब पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि ड्रग और गैंग नेटवर्क अब “जांगी” जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां मैसेज खुद डिलीट हो जाते हैं और पहचान छिपाना आसान होता है।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के मुताबिक लोग अब व्हाट्सऐप नंबर, टेलीग्राम हैंडल, सोशल मीडिया यूआरएल और संदिग्ध वेबसाइट सीधे रिपोर्ट कर सकते हैं।

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पुलिस और जांच एजेंसियां अब साइबर मॉनिटरिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश में जुटी हैं। आने वाले समय में सोशल मीडिया आधारित अपराध कानून व्यवस्था के लिए और बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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