Mangala Gauri Vrat 2026 :कब है पहला मंगला गौरी व्रत? बन रहे हैं 3 शुभ योग, जानें पूजा का सही समय और नियम

सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, नवविवाहित महिलाओं के लिए विशेष नियम, भद्रा-पंचक का समय और मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व।
कब है पहला मंगला गौरी व्रत? बन रहे हैं 3 शुभ योग, जानें पूजा का सही समय और नियम
सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन माता गौरी के साथ भगवान शिव और श्रीगणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। इस साल सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को पड़ रहा है।

पहला मंगला गौरी व्रत कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो रात 10:03 बजे तक रहेगी।

पहले मंगला गौरी व्रत पर बन रहे हैं 3 शुभ योग

इस बार पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योग बनने जा रहे हैं। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग शामिल हैं। इन तीनों योगों की शुरुआत रात 9:54 बजे होगी और ये 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन योगों में पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।

जानें शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक

प्रातः सन्ध्या    : सुबह 04:41 बजे से 05:44 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:41 बजे से 03:35 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:10 बजे से 07:31 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:10 बजे से 08:13 बजे तक

अमृत काल : शाम 07:30 बजे से 09:06 बजे तक

निशिता मुहूर्त : रात 12:06, 05 अगस्त से 12:48, अगस्त 05 बजे तक

विशेष योग

सर्वार्थ सिद्धि योग : रात 09:54 बजे से सुबह 05:45, अगस्त 05 बजे तक 

अमृत सिद्धि योग : रात 09:54 पी एम से सुबह 05:45, अगस्त 05 बजे तक

रवि योग : रात 09:54 से 05:45, अगस्त 05 बजे तक

पूजा का शुभ समय : सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक

सूर्यास्त : शाम 7:10 बजे

जिन घरों में प्रदोष काल में पूजा की जाती है, वे शाम 7:10 बजे के बाद मंगला गौरी की पूजा कर सकते हैं।

Religious

नवविवाहित महिलाओं के लिए विशेष नियम

जिन महिलाओं का इस साल विवाह हुआ है और यह उनका पहला सावन है, उन्हें मंगला गौरी का व्रत अपने मायके में करना चाहिए। इसके बाद अगले चार वर्षों तक यह व्रत ससुराल में करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह के बाद लगातार पांच साल तक मंगला गौरी व्रत करना शुभ माना जाता है।

पहले मंगला गौरी व्रत पर भद्रा और पंचक

पहले मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग रहेगा।

भद्रा : रात 10:03 बजे से 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक

पंचक : सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक

ज्योतिष के अनुसार, इस दिन चोर पंचक रहेगा। ऐसे में लोगों को अपने सामान और धन की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इससे पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं, जिन युवतियों का विवाह नहीं हुआ है या शादी में बाधाएं आ रही हैं, वे भी यह व्रत रखती हैं। माना जाता है कि मंगला गौरी व्रत से जल्द विवाह के योग बनते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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