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Akshaya Navami 2025 :अक्षय नवमी पर क्यों करते हैं आंवले का सेवन और पेड़ की पूजा? जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है। जानें इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आंवले के सेवन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
अक्षय नवमी पर क्यों करते हैं आंवले का सेवन और पेड़ की पूजा? जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    धर्म डेस्क। दिवाली के ठीक 10 दिन बाद आने वाली अक्षय नवमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान और पूजा का फल कभी समाप्त नहीं होता। अक्षय नवमी को देश के अलग-अलग हिस्सों में आंवला नवमी, कूष्मांड नवमी और आरोग्य नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से सुख-समृद्धि, संतान सुख और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    अक्षय नवमी 2025 का शुभ मुहूर्त

    दिवाली के ठीक 10 दिन बाद मनाई जाने वाली अक्षय नवमी का शास्त्रों में बहुत महत्व है। इस साल अक्षय नवमी 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

    • अक्षय नवमी पूर्वाह्न समय- सुबह 06:32 से 10:03 बजे तक
    • नवमी तिथि प्रारंभ- 30 अक्टूबर, सुबह 10:06 बजे
    • नवमी तिथि समाप्त- 31 अक्टूबर, सुबह 10:03 बजे

    आंवला नवमी का विशेष महत्व

    ‘अक्षय’ का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो। इस दिन किए गए दान, पूजा और अच्छे कर्मों का फल अक्षय यानी सदा बना रहता है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इस दिन आंवले का सेवन और पूजन करने से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

    दान और स्नान का महत्व

    अक्षय नवमी पर स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। अगर तीर्थ स्थान न जा सकें, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने कूष्माण्ड नामक दैत्य का वध किया था। दैत्य के शरीर से कूष्माण्ड की बेल उत्पन्न हुई थी, इसलिए इसे कूष्माण्ड नवमी भी कहा जाता है। इस दिन पेठे या कद्दू का दान और उसका पूजन करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

    अक्षय नवमी 2025 पूजा विधि

    • सुबह स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
    • घर या मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
    • पीले फूल, तुलसी दल, दीपक, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
    • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
    • आंवले के वृक्ष की पूजा करें और कच्चे सूत से परिक्रमा करें।
    • वृक्ष को जल, हल्दी, रोली, फूल और दीपक अर्पित करें।
    • गरीबों और ब्राह्मणों को दान व भोजन कराएं।
    • अंत में आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करें।

    अन्य धार्मिक मान्यताएं

    उड़ीसा में इस दिन जगतधात्री माता की पूजा होती है, जो मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं। वहीं मथुरा परिक्रमा की शुरुआत भी अक्षय नवमी के दिन से होती है।

    People's Reporter
    By People's Reporter

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