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राम मंदिर चढ़ावा मामला : 10 करोड़ की सुरक्षा के बावजूद कैसे हुई चूक? अब जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच अब सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं है। एसआईटी सीसीटीवी, सुरक्षा व्यवस्था, पास सिस्टम और तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। 11 महीनों में सुरक्षा पर 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद उठे सवालों ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
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10 करोड़ की सुरक्षा के बावजूद कैसे हुई चूक? अब जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी मामले की जांच लगातार नई परतें खोल रही है। शुरुआत में जांच का केंद्र रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव था, लेकिन अब मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली को खंगालने में जुटा है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक परिसरों में शामिल राम मंदिर में यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसके पीछे कौन-कौन सी व्यवस्थागत खामियां जिम्मेदार हो सकती हैं। 

सीसीटीवी सिस्टम पर सबसे ज्यादा फोकस

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आई है। जांचकर्ताओं ने मंदिर परिसर में लगे कैमरों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्डिंग सिस्टम, बैकअप व्यवस्था और डिजिटल डेटा से जुड़ी जानकारी जुटाई है। इस सिलसिले में रेडियो मेंटिनेंस ऑफिसर (आरएमओ) की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। बताया जा रहा है कि यह अधिकारी करीब 17 वर्षों से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी लंबी अवधि तक एक ही जिम्मेदारी संभालने के दौरान व्यवस्था कैसे संचालित होती रही। एसआईटी ने डिजिटल रिकॉर्ड, पेन ड्राइव, स्टोरेज सिस्टम और तकनीकी दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि निगरानी तंत्र की पूरी तस्वीर समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

सबसे बड़ा सवाल, सुरक्षा के बीच चूक कैसे हुई?

राम मंदिर में सुरक्षा के कई स्तर मौजूद हैं। परिसर में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा कर्मी और आधुनिक निगरानी व्यवस्था तैनात है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि चढ़ावे या दान राशि को लेकर कोई गड़बड़ी हुई तो वह इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच कैसे संभव हुई। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर स्तर की जांच जरूरी है।

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पास व्यवस्था भी जांच के घेरे में

एसआईटी अब मंदिर परिसर में जारी होने वाले विशेष पासों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह देखा जा रहा है कि किन लोगों को विशेष अनुमति दी गई, किस आधार पर पास जारी हुए और प्रवेश-निकास की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही। कुछ लोगों की आवाजाही के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि कहीं किसी ने व्यवस्था का गलत फायदा तो नहीं उठाया।

10 करोड़ की सुरक्षा और बढ़ते सवाल

इस मामले में एक आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है। जानकारी के अनुसार पिछले 11 महीनों में राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस राशि का उपयोग सुरक्षा उपकरणों, निगरानी तंत्र और सुरक्षा कर्मियों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर किया गया। इसके बावजूद चोरी या गड़बड़ी के आरोप सामने आने से कई सवाल उठ रहे हैं।

वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा

दान राशि की गिनती से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया। वीडियो में गिनती की प्रक्रिया व्यवस्थित दिखाई देती है, लेकिन जांच अधिकारी इसे अंतिम प्रमाण मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि वीडियो से कुछ सवालों के जवाब मिलते हैं, लेकिन कई नए सवाल भी खड़े होते हैं। 

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125 लोगों से पूछताछ, 200 तक पहुंच सकता है आंकड़ा

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। कई कर्मचारियों को दोबारा बुलाकर बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच एजेंसी विभिन्न बयानों का मिलान कर रही है ताकि किसी भी विरोधाभास को समझा जा सके। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में करीब 200 लोगों से पूछताछ की जा सकती है। टिन्नू यादव से भी कई दौर की पूछताछ हो चुकी है और सवालों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

ट्रस्ट की व्यवस्था पर भी नजर

जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था भी चर्चा में है। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, निर्माण समिति प्रमुख नृपेंद्र मिश्र, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, डॉ. अनिल कुमार मिश्र और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। लेकिन पूरे प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास जरूर किया जा रहा है। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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