'सरकार का विरोध करें, लेकिन भाषा की मर्यादा रखें', खरगे के बयान पर भड़के राजनाथ सिंह

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासी विवाद बढ़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खरगे के बयान की निंदा करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार का विरोध करना और उसकी नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन भाषा में मर्यादा होनी चाहिए।
राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब खरगे के बयान को सही ठहराकर लोगों की भावनाओं को और आहत कर रही है। उन्होंने इसे केवल एक व्यक्ति या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान बताया।
'व्यक्तिगत मर्यादा की सीमा न लांघें'
राजनाथ सिंह ने कहा कि पटना में कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी ने उन्हें स्तब्ध और आहत किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षित नहीं है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, खरगे के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से उसका बचाव किया जाना भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गलती स्वीकार कर खेद जताने के बजाय पार्टी बयान को सही ठहराने में जुटी है।
'कांग्रेस की राजनीति का स्तर गिर रहा है'
राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत अपमान में बदल रही है। उन्होंने कहा कि पहले भी प्रधानमंत्री की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी मां को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन असहमति को अभद्र भाषा तक ले जाना भारतीय राजनीति की गरिमा के खिलाफ है। राजनाथ सिंह ने इसे कांग्रेस की हताशा और वैचारिक शून्यता बताया।
'सरकार का विरोध करें, लेकिन भाषा में मर्यादा रखें'
रक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना और नीतियों पर सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि वैचारिक पतन भी हुआ है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी टिप्पणियों से न तो विचलित होंगे और न ही जनसेवा के उनके संकल्प को कमजोर किया जा सकेगा।



















