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7 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा! कुंभ से पहले नासिक का शंखनाद दुनिया में छाया, 303 का रिकॉर्ड तोड़ 517 लोगों ने एक साथ बजाया शंख

महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं ने एक खास उपलब्धि हासिल की। गोदावरी नदी के किनारे 517 लोगों ने एक साथ शंख बजाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमेरिका के न्यू जर्सी में 303 लोगों के नाम था। 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह में भी शंखनाद किया जाएगा।
7 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा! कुंभ से पहले नासिक का शंखनाद दुनिया में छाया, 303 का रिकॉर्ड तोड़ 517 लोगों ने एक साथ बजाया शंख
नासिक में 517 श्रद्धालुओं का शंखनाद

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले धार्मिक परंपरा और सामूहिक भागीदारी का अनोखा नजारा देखने को मिला। रविवार को गोदावरी नदी के तट पर 517 श्रद्धालुओं ने एक साथ शंख बजाकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। इस कार्यक्रम में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के वरिष्ठ निर्णायक ऋषि नाथ ने उपलब्धि की घोषणा की। इससे पहले साल 2019 में अमेरिका के न्यू जर्सी में 303 लोगों ने एक साथ शंख बजाने का रिकॉर्ड बनाया था। अब नासिक की इस उपलब्धि ने कुंभ मेले की तैयारियों को नई पहचान दी है। आगामी 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह में भी शंखनाद किया जाएगा।

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517 लोगों के शंखनाद से टूटा पुराना रिकॉर्ड

नासिक के देवमामालेदार यशवंत महाराज पटांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में अलग-अलग उम्र के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने करीब पांच मिनट 30 सेकंड तक एक साथ शंख बजाया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और नई उपलब्धि का जश्न मनाया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए प्रमाणित शंख चेन्नई से मंगवाए गए थे। इस आयोजन को नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला अथॉरिटी ने गुनगौरव ट्रस्ट की अनंतविजय शंखनाद टीम के साथ मिलकर आयोजित किया।

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कुंभ मेले की शुरुआत से जुड़ी खास पहल

नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला अथॉरिटी के आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि शंखनाद की इस पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को कुंभ मेले की शुरुआत से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह के दौरान 251 प्रतिभागी एक साथ शंख बजाएंगे। इस आयोजन से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। कुंभ मेला और जिला पालक मंत्री गिरीश महाजन ने भी प्रतिभागियों को बधाई दी और स्थानीय लोगों से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करने की अपील की।

31 अक्टूबर को रामकुंड में होगा ध्वजारोहण

सिंहस्थ कुंभ मेले का ध्वजारोहण समारोह 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक के रामकुंड में होना तय है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित किया गया है। इसी अवसर पर शंखनाद के विश्व रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी सौंपा जाएगा। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाला यह धार्मिक आयोजन 31 अक्टूबर 2026 से 24 जुलाई 2028 तक चलेगा। दोनों शहरों में लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

सरकारी अनुमान के मुताबिक, कुंभ मेले के दौरान नासिक में 8 से 10 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में करीब 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। इस आयोजन में नासिक में 44 और त्र्यंबकेश्वर में 53 स्नान मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। यहां वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर होते हैं। इसी वजह से दोनों शहर कुंभ मेले के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।

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सिंहस्थ कुंभ नाम पड़ने की क्या है वजह?

नासिक के कुंभ मेले को सिंहस्थ कहा जाता है, क्योंकि इसकी तिथियां तय करने में बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश का खास महत्व माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इसी मान्यता से इन चारों स्थानों पर कुंभ मेले की परंपरा जुड़ी हुई है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...

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