चक्रवात 'अर्नब' से मचेगी तबाही! ओडिशा के 6 जिलों में पाबंदियां, स्कूल-कॉलेज बंद, समुद्र में जाने पर रोक

बंगाल की खाड़ी में उठ रहा चक्रवाती तूफान 'अर्नब' अब खतरनाक रूप लेता जा रहा है। इसके चलते ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने दोनों राज्यों के तटीय इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। हालात को देखते हुए ओडिशा सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी गई है। वहीं, छह जिलों में पहाड़ों, झरनों और बांधों पर पर्यटकों के जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
28 अक्टूबर को तट से टकरा सकता है तूफान
जानकारी के मुताबिक, चक्रवात अर्नब बुधवार, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव पिछले छह घंटों में करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा और चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके सोमवार आधी रात तक गंभीर चक्रवाती तूफान और मंगलवार, 27 अक्टूबर को बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों के लिए रेड मैसेज जारी किया है।
ओडिशा के इन 6 जिलों में बढ़ाई गई सख्ती
तूफान के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने छह जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इनमें गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, मलकानगिरी, कोरापुट और नवरंगपुर शामिल हैं। इन जिलों में पहाड़ी इलाकों, झरनों, बांधों और दूसरे पर्यटन स्थलों पर लोगों के जाने पर रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि भारी बारिश के दौरान इन जगहों पर हादसों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
28 और 29 अक्टूबर को स्कूल-कॉलेज बंद
चक्रवात के कारण ओडिशा के संवेदनशील इलाकों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान बेवजह घरों से बाहर नहीं निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। वहीं, समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
आठ मंत्रियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तूफान से निपटने की तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग इलाकों की जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार ने संवेदनशील जिलों में जरूरी संसाधन और बचाव दल तैनात कर दिए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीमें अलर्ट पर हैं। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत कार्य शुरू करने के लिए तैयार रखा गया है।
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कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
तूफान के खतरे को देखते हुए प्रभावित जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। इसके अलावा राहत और बचाव कार्यों पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। अधिकारियों को लगातार मौसम की स्थिति पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के लिए भी जारी हुई सलाह
चक्रवात से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जिनकी फसलें 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी हैं, वे उनकी कटाई कर सुरक्षित जगह पर रख लें। किसानों की मदद के लिए विशेष कृषि हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सही जानकारी मिल सके।
सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि भले ही चक्रवात के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है, लेकिन ओडिशा सरकार कोई जोखिम नहीं उठाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। तूफान के तट से टकराने के बाद इसका असर ओडिशा के कुछ इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल प्रशासन लोगों से सतर्क रहने, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है।




















