CG NEWS:CG में दर्दनाक हादसा: आंधी-तूफान से फैक्ट्री की दीवार ढही, मलबे में दबकर महिला मजदूर की मौत

RAIPUR/RAIGRAH NEWS रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार शाम तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया। दो उद्योगों के बीच बनी बाउंड्रीवॉल अचानक गिर गई, जिससे झोपड़ी में रह रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में एक महिला मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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तेज आंधी बनी मौत का कारण
रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र अंतर्गत चिराईपानी स्थित औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, तूफान और बारिश के बीच ओम रूपेश उद्योग और महालक्ष्मी उद्योग के बीच बनी बाउंड्रीवॉल भरभराकर गिर गई। दीवार सीधे मजदूरों की झोपड़ी पर जा गिरी, जिससे कई लोग मलबे में दब गए।
महिला मजदूर की दर्दनाक मौत
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया। इस दौरान रंभा यादव नामक महिला मजदूर गंभीर रूप से घायल मिली। उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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दो मजदूर अस्पताल में भर्ती
घटना में घायल दो अन्य मजदूरों को तत्काल रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। दोनों का इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
गर्भवती होने की चर्चा से बढ़ी संवेदनाएं
स्थानीय स्तर पर मृतक महिला के गर्भवती होने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि यह जानकारी सही साबित होती है तो हादसा और भी अधिक दुखद माना जाएगा।
जांच में जुटी पुलिस
पूंजीपथरा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बाउंड्रीवॉल किन परिस्थितियों में गिरी और क्या निर्माण गुणवत्ता या सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।
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मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। उद्योगों के आसपास अस्थायी झोपड़ियों में रहने वाले श्रमिक प्राकृतिक आपदाओं और औद्योगिक जोखिमों के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा ऑडिट और संरचनात्मक जांच नियमित रूप से कराई जानी चाहिए।












