CG NEWS:रायपुर में ऑटो-ई-रिक्शा पर डिजिटल लगाम! QR कोड से होगी ड्राइवर की पूरी कुंडली चेक।

PREM KUMAR RAIPUR NEWS। रायपुर में लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी के दायरे में आने जा रही है। प्रशासन ने 15 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा चालकों का रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है। 19 जून से चालकों को यूनिक आईडी और क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे, जबकि जुलाई से शहरभर में निर्धारित स्टॉपेज व्यवस्था लागू होगी। नई व्यवस्था का मकसद ट्रैफिक जाम कम करना, अवैध संचालन रोकना और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है।
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QR कोड से खुलेगी ड्राइवर की पूरी जानकारी
रायपुर में ई-रिक्शा और ऑटो संचालन को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया है। 19 जून से रजिस्टर्ड चालकों को यूनिक आईडी और क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे। वाहन पर लगाए जाने वाले इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही चालक, वाहन मालिक और वाहन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। इससे पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल जांच करने में मदद मिलेगी।
जुलाई से सड़क पर लागू होगा नया स्टॉपेज सिस्टम
शहर में बढ़ती अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने करीब 200 स्थानों को ई-रिक्शा और ऑटो स्टॉपेज के रूप में चिन्हित किया है। जुलाई से चरणबद्ध तरीके से इन स्टॉपेज को लागू किया जाएगा। प्रत्येक ट्रैफिक थाना क्षेत्र में 20 से 25 अधिकृत स्टॉपेज विकसित किए जा रहे हैं, जहां से वाहनों का संचालन होगा।
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15 हजार चालकों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन पूरा
प्रशासन ने अब तक 15 हजार से अधिक ई-रिक्शा चालकों का डिजिटल सत्यापन और पंजीकरण पूरा कर लिया है। इसके जरिए प्रत्येक चालक की पहचान, संचालन क्षेत्र और अन्य रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी संचालन और नियम उल्लंघन की घटनाओं में कमी आएगी।
20 हजार ई-रिक्शा बने ट्रैफिक की चुनौती
रायपुर में वर्तमान में 20 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा और लगभग 8 हजार ऑटो संचालित हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन, अस्पताल, बाजार और प्रमुख चौक-चौराहों पर अनियंत्रित पार्किंग के कारण जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। नई व्यवस्था से ट्रैफिक दबाव कम होने और परिवहन संचालन में अनुशासन आने की उम्मीद है।
जोन सिस्टम पर अभी अटका फैसला
प्रशासन भविष्य में शहर को जोन आधारित परिवहन व्यवस्था में बांटने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि यूनियनों के विरोध के चलते यह योजना फिलहाल लंबित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंदौर और बेंगलुरु की तर्ज पर जोन सिस्टम लागू होने से ट्रैफिक प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सकता है।












