Peoples Update Special :15 साल पुरानी बसों के नियम पर बवाल, 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे प्राइवेट बस ऑपरेटर्स

विजय एस. गौर, भोपाल। परिवहन विभाग के वर्ष 2015 के नियम के तहत 15 साल पुरानी यात्री बसों को मध्यप्रदेश में रूट परमिट नहीं मिलता, जबकि इन्हीं बसों को देशभर में अस्थायी परमिट जारी किए जा सकते हैं। इसी नियम के विरोध में 7 अगस्त की रात 12 बजे से प्रदेशभर के प्राइवेट बस ऑपरेटर्स हड़ताल पर जाएंगे। परिवहन मंत्री ने मामले के अध्ययन के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने का प्रस्ताव सचिवालय को भेज दिया है। हड़ताल होने पर प्रदेश के भीतर और तीर्थ यात्रा सहित कुल 28 हजार बसों का संचालन प्रभावित होगा।
15 साल पुरानी बसों के नियम पर बस ऑपरेटर्स की आपत्ति
देशभर में सिर्फ मध्यप्रदेश में ऐसा प्रावधान है कि 15 साल पुरानी यात्री बसों को प्रदेश के अंदर संचालन के लिए रूट परमिट जारी नहीं किया जाता। जबकि इन्हीं बसों को देशभर में तीर्थ यात्रा या विशेष आयोजनों के लिए अस्थायी परमिट जारी किए जा सकते हैं। वर्ष 2015 में परिवहन विभाग ने यह नियम लागू किया था, जिसका प्राइवेट बस ऑपरेटर्स लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस नियम में अब तक कोई राहत नहीं दी गई है।
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7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
नियम में संशोधन नहीं होने के विरोध में प्रदेशभर के प्राइवेट बस ऑपरेटर्स 7 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। हड़ताल की स्थिति में मध्यप्रदेश के भीतर संचालन करने वाली करीब 12 हजार बसों के साथ तीर्थ यात्रा और अन्य प्रयोजनों में लगी कुल 28 हजार बसों के पहिए थम जाएंगे। इससे प्रदेशभर में यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरे राज्यों के नियमों से की जा रही तुलना
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि मध्यप्रदेश में 15 साल पुरानी बसों का रूट परमिट नहीं मिलता, जबकि अन्य राज्यों में बस की फिटनेस होने पर उसके संचालन की अनुमति दी जाती है। दिल्ली में 10 साल पुरानी बसों के संचालन पर रोक है, लेकिन अन्य राज्यों में फिटनेस को ही आधार माना जाता है। इसी अंतर को लेकर बस संचालक मध्यप्रदेश के नियमों में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
परिवहन मंत्री ने समिति गठन का प्रस्ताव भेजा
बस ऑपरेटर्स की हड़ताल की घोषणा के बाद परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बस संचालकों के साथ बैठक की। बातचीत के बाद अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने पर सहमति बनी। मंगलवार को हुई बैठक में परिवहन मंत्री ने बताया कि समिति गठन का प्रस्ताव सचिवालय भेज दिया गया है, जिसमें चार सदस्य बस ऑपरेटर्स भी होंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर 15 साल पुराने नियम में संशोधन पर विचार किया जाएगा।
ऑपरेटर्स और परिवहन विभाग ने रखी अपनी बात
बस ऑनर्स एसोसिएशन के जय कुमार जैन ने कहा कि 15 साल पुरानी यात्री बस मध्यप्रदेश में नहीं चल सकती, जबकि वही बस देशभर में फिटनेस के आधार पर संचालित हो सकती है। उन्होंने इसे अजीब नियम बताते हुए हड़ताल का कारण बताया। वहीं परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने कहा कि बस ऑपरेटर्स की आपत्ति को देखते हुए अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन कराया जाएगा और उसके बाद आवश्यक संशोधन पर विचार किया जा सकता है।












