Punjab Election 2027: इंदिरा गांधी हत्याकांड के दोषी केहर सिंह के बेटे को मिला टिकट, बस्सी पठाना से लड़ेंगे चुनाव

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना विधानसभा सीट चर्चा में आ गई है। अकाली दल वारिस पंजाब दे (ADWPD) ने इस सीट से एक ऐसे उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है, जिसके बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी ने सतवंत सिंह को बस्सी पठाना सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सतवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में दोषी ठहराए गए केहर सिंह के बेटे हैं।
ADWPD ने सतवंत सिंह को बनाया उम्मीदवार
अकाली दल वारिस पंजाब दे ने सोमवार, 10 अगस्त को बस्सी पठाना विधानसभा सीट के लिए सतवंत सिंह की उम्मीदवारी का ऐलान किया। यह घोषणा अमृतसर में सांसद सरबजीत सिंह खालसा की अगुवाई में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तरसेम सिंह ने सतवंत सिंह के नाम की घोषणा की। तरसेम सिंह जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता हैं।
पंथ और पंजाब के लिए बलिदान देने वाले परिवारों का सम्मान
उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए पार्टी की ओर से कहा गया कि यह फैसला उन परिवारों के सम्मान में लिया गया है, जिन्होंने पंथ और पंजाब के लिए बलिदान दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी साझा की। पोस्ट में उन्हें शहीद भाई केहर सिंह का बेटा बताते हुए बस्सी पठाना से उम्मीदवार घोषित करने की बात कही गई।
कौन हैं सतवंत सिंह?
61 वर्षीय सतवंत सिंह, केहर सिंह के बेटे हैं। केहर सिंह को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में दोषी ठहराया गया था और उन्हें फांसी की सजा दी गई थी। सतवंत सिंह पेशे से बैंक अधिकारी रहे हैं और अब रिटायर हो चुके हैं। उनकी राजनीति में यह पहली एंट्री होगी। अगर आगे उनकी उम्मीदवारी में कोई बदलाव नहीं होता है, तो वह 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
बस्सी पठाना सीट पर बढ़ी सियासी हलचल
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में राजनीतिक दल लगातार अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। बस्सी पठाना सीट पर कई पंथिक नेताओं की दावेदारी के बीच ADWPD का सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। अब इस सीट पर चुनावी मुकाबला और सियासी समीकरण किस दिशा में जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।











