RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत बालाघाट पहुंचे, कहा-भाषण से नहीं, सेवा के काम से बनती है पहचान

बालाघाट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मंगलवार को बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र के ग्राम कारंजा पहुंचे। उन्होंने यहां नवनिर्मित स्मृति भवन और माधव नेत्रालय का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में भागवत ने स्पष्ट कहा कि जहां प्रत्यक्ष रूप से काम हो रहा हो, वहां अधिक बोलने की आवश्यकता नहीं होती। भाषण अपनी जगह है, लेकिन कार्य का महत्व उससे कहीं अधिक है। भागवत दोपहर करीब 12 बजे कारंजा पहुंचे। माधव नेत्रालय में विश्राम के बाद वे दोपहर 2.30 बजे लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस के छायाचित्र पर माल्यार्पण से हुई। उन्होंने दोनों के राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित जीवन को याद किया।

संघ संस्कारों से सेवा की भावना मजबूत होती है
संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर संगठन कौशल, मातृभूमि के प्रति भक्ति और समाज के प्रति सेवा का भाव विकसित करना है। संघ लोगों को यह संस्कार देता है कि हर व्यक्ति को अपना मानकर उसके सुख-दुख में साथ खड़ा होना चाहिए। बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस ने अपने जीवन में इन्हीं मूल्यों को व्यवहार में उतारा। उन्होंने कहा कि भारत की मिट्टी और संस्कृति में ही दूसरों के दुख को महसूस करने की विशेष भावना है। पिछले 200 वर्षों में भारत में जितने महापुरुष हुए हैं, उतने पूरी दुनिया के इतिहास में देखने को नहीं मिलते।
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स्मित मछार के साहस को बताया भारतीय संस्कारों का उदाहरण

भागवत ने विमान में यात्रियों की जान बचाने वाले स्मित मछार के साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि चाकू का घाव लगने के बावजूद उन्होंने अपने प्राणों की चिंता किए बिना अन्य यात्रियों को बचाने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह घटना भारतीय संस्कृति में मौजूद परोपकार और त्याग की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जीवन की अंधाधुंध दौड़ में लोग कई बार इन मूल संस्कारों को भूल जाते हैं। भागवत ने बालासाहेब देवरस के व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर में उनकी चर्चा होती थी, लेकिन इसके बावजूद वे सभी के साथ सामान्य व्यवहार रखते थे। वे स्वयं को भारत का सेवक मानते थे। कारंजा में निर्मित स्मृति भवन में बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस के जीवन, कार्य और संघ से जुड़े योगदान की स्मृतियों को प्रदर्शित किया गया है। वहीं माधव नेत्रालय के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को नेत्र जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
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