CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन का मार्च, बीजेडी की हुई एंट्री

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अन्य विपक्षी दल भी नैतिक रूप से इस मार्च के साथ थे। वहीं इंडिया गठबंधन में शामिल रही डीएमके और आम आदमी पार्टी मार्च में शामिल नहीं हुईं, हालांकि दोनों दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने-अपने तरीके से आंदोलन करने की बात कही है। इससे पहले 30 अगस्त को सीईसी के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए हुई इंडिया गठबंधन की बैठक से भी आप, डीएमके और बीजेडी दूर रही थीं।
कांग्रेस बोली- अन्य विपक्षी दल भी नैतिक रूप से साथ
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि चुनाव आयोग तक निकाले गए विरोध मार्च में इंडिया गठबंधन के सांसद शामिल थे। उन्होंने बताया कि मार्च को निर्वाचन सदन के पास आकाशवाणी भवन के सामने रोक दिया गया और बीजेडी के सांसद भी इसमें शामिल हुए। जयराम रमेश ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि अन्य विपक्षी दल भी नैतिक रूप से इस मार्च के साथ थे, साथ ही वे दल भी जो फिलहाल कुछ समय के लिए एनडीए का हिस्सा हैं।
आप और डीएमके मार्च से रहीं दूर
इंडिया गठबंधन में शामिल रही एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी इस मार्च में शामिल नहीं हुईं। हालांकि दोनों दलों का कहना है कि वे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हैं और अपने-अपने तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। दोनों ही पार्टियां कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की कोशिश करती दिख रही हैं, जबकि कांग्रेस और आप के बीच दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान तल्खी बढ़ गई थी।
तमिलनाडु में भी कांग्रेस-DMK के रिश्तों में दूरी
डीएमके और कांग्रेस ने तमिलनाडु में साथ विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ दिया और सीएम विजय को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके बाद कांग्रेस और डीएमके के बीच दूरी बढ़नी शुरू हो गई। यही वजह है कि 30 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए हुई इंडिया गठबंधन की बैठक से भी डीएमके और आप दूर रही थीं।
जयराम रमेश बोले- विपक्ष की एकजुटता कायम रहेगी
जयराम रमेश ने कहा कि वोट चोरी हो या परिसीमन, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी के मंसूबों को नाकाम करने के लिए विपक्ष की एकजुटता निश्चित रूप से कायम रहेगी। उन्होंने दावा किया कि भारतीय झूठ पार्टी की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इस मार्च में बीजेडी सांसदों की भागीदारी ने विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू कर दी है।



















