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अशोकनगर पुलिस का खुलासा- दूसरी बेटी होने से दुखी थी मां, अस्पताल में ही गला घोंटकर मार डाला

अशोकनगर जिला अस्पताल में एक दिन की नवजात बच्ची की गला दबाकर हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार बच्ची की मां ने बेटे की चाहत और परिवार के तानों के डर से उसकी हत्या की। पीएम रिपोर्ट में गला दबाने की पुष्टि के बाद आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया गया।
अशोकनगर पुलिस का खुलासा- दूसरी बेटी होने से दुखी थी मां, अस्पताल में ही गला घोंटकर मार डाला
अशोकनगर। नवजात बेटी को अस्प्ताल में ही मार डालने की घटना के बारे में एसपी राजीव मिश्रा ने विस्तृत जानकारी दी।

अशोकनगर। जिला अस्पताल में एक दिन की नवजात बच्ची की गला दबाकर हत्या के मामले का मंगलवार को पुलिस ने खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, बच्ची की मां भावना विश्वकर्मा ने बेटे की चाह और परिवार के तानों के डर से यह कृत्य किया। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म स्वीकार किया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि चंदेरी क्षेत्र के सकर्रा गांव की रहने वाली भावना पत्नी केदार विश्वकर्मा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  2 अक्टूबर की रात उसने बच्ची को जन्म दिया था।  3 अक्टूबर को अस्पताल में ही नवजात बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। 

पीएम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

एसपी ने बताया कि घटना के समय अस्पताल के बेड पर महिला की सास सो रही थी। नवजात बच्ची मां के पास कंबल में सो रही थी। उसी दौरान महिला ने बच्ची की गला दबा कर हत्या कर दी। इस घटना के लगभग आधे घंटे बाद बच्ची के मुंह से खून निकलता दिखा। इसके बाद महिला ने सास को इसकी जानकारी दी। सास बच्ची को लेकर डॉक्टर के पास पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

बेटे की चाहत और तानों का डर बनी वजह

पुलिस ने नवजात का पीएम कराया। पीएम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि बच्ची की मौत गला दबाने से हुई है। इसके बाद पुलिस ने नवजात की मां, पिता, सास और अन्य परिजनों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि उसने ही बच्ची का गला दबाया था। 

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दूसरी बार भी बेटी होने से परेशान थी

आरोपी महिला ने बताया कि उसकी पहले से दो वर्ष की बेटी है। उसे बेटे की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी बार भी बेटी होने के कारण परेशान थी।  दोनों बच्चों की जिम्मेदारी संभालने की चिंता और परिवार की ओर से ताने मिलने के डर से उसने यह कदम उठाया। मामले के साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस टीम ने जिला अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। हालांकि, जिस जगह महिला अपनी बच्ची के साथ बैठी थी, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था।  

इनकी सराहनीय भूमिका 

मामले में थाना प्रभारी कोतवाली रवि प्रताप सिंह चौहान, उनि पुनीत दीक्षित, जंग बहादुर सिंह तोमर, सोनम यादव, सउनि मनजीत त्रिवेदी, आरक्षक बृजभान, राजू सूर्यवंशी, पवन,अभयराज रघुवंशी, महिला आरक्षक रूबी रघुवंशी, पूजा कुशवाह की सराहनीय भूमिका रही। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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