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MP News : मध्यप्रदेश में अब जल्द एक पौधे से मिलेंगे आलू-टमाटर और बैगन-आलू   

अब एक पौधे में आलू के साथ टमाटर या बैगन के साथ आलू लगा देखा जा सकता है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि ग्वालियर और भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) वाराणसी के वैज्ञानिकों के प्रयासों के परिणामस्वरूप मिली जुली सब्जियों वाले पेड़ों को देखा जा सकेगा।  ये संस्थान सब्जी उत्पादन की नई तकनीक और उन्नत बीज तैयार कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में अब जल्द एक पौधे से मिलेंगे आलू-टमाटर और बैगन-आलू   

आशीष शर्मा,ग्वालियर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि ग्वालियर और भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वैज्ञानिक मिलकर ऑर्गेनिक फार्मिंग के जरिए लौकी, तोरई, भिंडी, कद्दू जैसी सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने पर काम करेंगे, साथ ही सब्जियों के नए-नए बीज भी तैयार किए जाएंगे। प्रदेश के किसान सब्जियां उगाकर ज्यादा मुनाफा कमा सकें, इसके लिए एक पौधे में टमाटर  बैगन (ब्रोमेटो) और पोटेटो टमाटर (पोमेटो) उगाने की नई तकनीक विकसित की जाएगी।

IIVR वाराणसी की तकनीक

यह तकनीक इंडियन इंस्टीट्यट ऑफ वेजीटेबल रिसर्च (IIVR) वाराणसी के वैज्ञानिकों ने तैयार की है। इस तकनीक के जरिए वाराणसी के किसान एक पौधे से दो तरह की सब्जी ले रहे हैं। कृषि विवि ग्वालियर के वैज्ञानिक इस पद्धति का प्रयोग करेंगे और सफल होने पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कृषि विवि ग्वालियर ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी से कुछ दिन पहले ही एमओयू किया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

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नई तकनीक और अनुसंधान पर फोकस

एमओयू के तहत सब्जी प्रजनन, संकर बीज उत्पादन, जैव प्रौद्योगिकी, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और उन्नत कृषि तकनीकों पर संयुक्त शोध किया जाएगा। दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक मिलकर ऐसी तकनीक विकसित करेंगे जो किसानों के लिए अधिक उपयोगी और कम लागत वाली साबित हो सके। कृषि विवि के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला और आईआईवीआर के निदेशक राजेश कुमार के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों संस्थान अपने वैज्ञानिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञता का साझा उपयोग करेंगे, जिससे इससे अनुसंधान कार्यों में तेजी आने के साथ नई किस्मों के विकास का मार्ग भी आसान होगा।

हमारे वैज्ञानिक तकनीक सीखकर प्रयोग करेंगे

प्रदेश के किसान जल्द ही एक पौधे से टमाटर-आलू, बैगन-आलू की सब्जियों की फसल उगा सकेंगे। यह तकनीक आईआईवीआर वाराणसी के वैज्ञानिकों ने तैयार की है। विवि और आईआईवीआर से एमओयू किया है, इसलिए हमारे वैज्ञानिक यह तकनीक सीखकर यहां प्रयोग करेंगे। इसके बाद किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, कृषि विवि ग्वालियर

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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