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MP High Court:9 साल नौकरी के बाद भी CPCT पास नहीं कर पाए कंप्यूटर इंजीनियर, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 9 साल नौकरी के बाद CPCT परीक्षा पास नहीं करने वाले कंप्यूटर इंजीनियर की बर्खास्तगी को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि बीई कंप्यूटर साइंस वाले कर्मचारी के लिए परीक्षा पास करना आसान था।
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9 साल नौकरी के बाद भी CPCT पास नहीं कर पाए कंप्यूटर इंजीनियर, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 9 साल की सेवा के बाद CPCT पास नहीं करने वाले एक कर्मचारी को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उसकी बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए दायर अपील खारिज कर दी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारी को परीक्षा पास करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिए गए थे लेकिन इसके बावजूद वह जरूरी योग्यता हासिल नहीं कर पाया।

3 साल में CPCT पास करने की थी शर्त

यह मामला सीधी जिले के ग्राम जमोदी कला निवासी अमित सिंह बघेल से जुड़ा है। अमित सिंह को 21 जुलाई 2016 को असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति आदेश में स्पष्ट शर्त रखी गई थी कि उन्हें तय अवधि में CPCT परीक्षा पास करनी होगी। नियमों के अनुसार तीन साल के भीतर यह योग्यता हासिल करना जरूरी था। हालांकि निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं करने पर विभाग ने उन्हें अतिरिक्त अवसर भी दिए। इसके बावजूद वे CPCT परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके।

26 मई 2025 को हुई सेवा समाप्त

CPCT पास नहीं करने के चलते विभाग ने 26 मई 2025 को अमित सिंह की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद उन्होंने बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी। पहले उन्होंने सिंगल बेंच में याचिका दायर की लेकिन 16 जून 2025 को उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की थी।

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कंप्यूटर इंजीनियर होने की दलील भी नहीं आई काम

अपीलकर्ता की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की है, जो किसी कंप्यूटर डिप्लोमा से कहीं ज्यादा उच्च योग्यता है। इसलिए उनकी कंप्यूटर दक्षता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। इस दलील को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी के पास कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री है, तो उनके लिए CPCT परीक्षा पास करना आसान होना चाहिए था।

कोर्ट ने कहा- 9 साल में मिले अवसरों का नहीं हुआ उपयोग

डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारी को लंबे समय तक सेवा में रहने के दौरान परीक्षा पास करने के पर्याप्त मौके मिले लेकिन उन्होंने इसका लाभ नहीं उठाया। ऐसे में विभाग की कार्रवाई को गलत नहीं माना जा सकता।

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चतुर्थ श्रेणी पद की नियुक्ति पर विचार का सुझाव

हालांकि MP High Court ने मामले में मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया। कोर्ट ने कहा कि यदि विभाग उचित समझे, तो परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में अमित सिंह को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति देने पर विचार कर सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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