CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस, आशुतोष रांका बोले- प्लेन में हम लोगों को किडनैप किया गया

नई दिल्ली। आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटों में देश ने तानाशाही का नंगा नाच देखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया। रांका ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे लोगों को हिरासत में लिया गया और ट्रेनों को रद्द कर आम लोगों को परेशान किया गया।
'हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया'
रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 72 घंटों में देश ने तानाशाही का दौर देखा है। उनके मुताबिक, देशभर में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे लोगों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कदमों से दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
ये भी पढ़ें: Dhruv Rathee का बड़ा आरोप, बोले- पुलिस ने किडनैप किया, बेडरूम में घुसकर सोते से उठाया; 23 घंटे तक रखा
'ट्रेनें रद्द होने से लाखों यात्रियों को हुई परेशानी'
आशुतोष रांका ने कहा कि जिस इमरजेंसी की कहानियां लोग अपने माता-पिता से सुनते आए हैं, पिछले 72 घंटों में उससे भी खराब हालात देखने को मिले। उन्होंने दावा किया कि 1975 की इमरजेंसी के दौरान भी ट्रेनों को इस तरह बंद नहीं करना पड़ा था। उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के बीच सैकड़ों ट्रेनें रद्द की गईं, जिससे लाखों यात्रियों को परेशानी हुई।
चुनाव आयोग को लेकर उठाए सवाल
रांका ने कहा कि शुरुआत में लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी, लेकिन अब यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने में लगी है और चुनाव आयोग बीजेपी को जिताने के लिए काम कर रहा है। ये आरोप उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए।
फ्लाइट से जबरन ले जाने का दावा
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें, सौरव दास और दीपके को फ्लाइट में घुसकर जबरन ले जाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को किडनैपिंग जैसा बताया। हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष इन आरोपों के साथ उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर नाराजगी
रांका ने अभिजीत की दादी के निधन का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परिवार में हुई मौत की सूचना मिलने के बाद भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उनके मुताबिक, दीपके अपने परिजनों से बात करना चाहता था, क्योंकि उसके माता-पिता को दिल की बीमारी है, लेकिन उसे अपने गांव में मौजूद रिश्तेदार से बात करने में परेशानी हुई।
'रिहाई के बाद गांव रवाना हुआ अभिजीत'
रांका ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने निजी दुख की घड़ी को भी कैमरे और माइक के सामने एक तमाशा बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि दीपके बार-बार अपने परिवार से बात करने की गुहार लगाता रहा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि रिहाई के तुरंत बाद अभिजीत अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैतृक गांव रवाना हो गया।




















