Dhruv Rathee का बड़ा आरोप, बोले- पुलिस ने किडनैप किया, बेडरूम में घुसकर सोते से उठाया; 23 घंटे तक रखा

मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद एक वीडियो जारी कर गुरुग्राम पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ध्रुव राठी का दावा है कि 10 अक्टूबर 2026 की सुबह सादे कपड़ों में आए लोग उनके घर में घुसे और उन्हें सोते हुए बेडरूम से उठाकर अपने साथ ले गए। उन्होंने इस कार्रवाई को हिरासत या गिरफ्तारी के बजाय ‘किडनैपिंग’ बताया है। राठी के मुताबिक, उन्हें करीब 22 से 23 घंटे तक अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में रखा गया, इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं और फोन- वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उन्होंने भारतीय नागरिकता और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के अधिकार का भी जिक्र किया।
रिहाई के बाद वीडियो में क्या बोले यूट्यूबर?
रिहा होने के बाद ध्रुव राठी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने कथित कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम बताते हुए पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। राठी ने कहा कि उनके घर पहुंचने वाले लोग सादे कपड़ों में थे और उन्होंने अपनी पहचान स्पष्ट करने या गिरफ्तारी की औपचारिक प्रक्रिया अपनाने जैसी कार्रवाई नहीं की। उनके मुताबिक, घर से बाहर निकलने पर उन्हें वहां 50 से ज्यादा लोग दिखाई दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोग उन्हें अपने साथ ले गए और इस दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे किसी गंभीर अपराध के आरोपी के साथ किया जाता है। ध्रुव राठी के इस वीडियो के सामने आने के बाद उनकी कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है।
बेडरूम में घुसकर सोते से उठाने का आरोप
ध्रुव राठी ने वीडियो में बताया कि 10 अक्टूबर, शनिवार की सुबह करीब 7 बजे वह अपने घर पर सो रहे थे। तभी दरवाजे की घंटी बजी। उनके मुताबिक, उनकी मां ने दरवाजा खोला तो बाहर कई लोग मौजूद थे। राठी का दावा है कि ये लोग पुलिस की वर्दी में नहीं थे, बल्कि सादे कपड़ों में आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग उनकी मां को धक्का देकर घर में घुसे और सीधे उनके बेडरूम तक पहुंच गए। इसके बाद उन्हें सोते हुए उठाया गया और विरोध करने के बावजूद अपने साथ ले जाया गया। यूट्यूबर ने सवाल उठाया कि अगर यह पुलिस की कार्रवाई थी, तो उन्हें किस आधार पर ले जाया गया और इसकी कानूनी प्रक्रिया क्या थी। उन्होंने इसी वजह से इस घटना को ‘किडनैपिंग’ बताया।
22 से 23 घंटे तक रखने और चोट लगने का दावा
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि घर से ले जाने के बाद उन्हें एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उनके मुताबिक, उन्हें लगभग 22 से 23 घंटे तक बैठाकर रखा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान उनका फोन छीन लिया गया था, जिसके कारण वह घटनाक्रम का वीडियो नहीं बना सके। राठी के अनुसार, उन्हें अपने वकील से संपर्क करने या फोन का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं दी गई। वीडियो में उन्होंने चोट लगने की बात भी कही।
जंतर-मंतर जाने पर दोबारा कार्रवाई की चेतावनी?
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में दावा किया कि उन्हें रिहा करते समय चेतावनी दी गई कि यदि वह दोबारा जंतर-मंतर गए, तो उनके खिलाफ फिर कार्रवाई की जा सकती है। इस दावे ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, कथित चेतावनी किस अधिकारी ने दी और किन परिस्थितियों में दी गई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक आंदोलनों के लिए जाना जाता है। किसी भी प्रदर्शन के दौरान लागू नियमों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना जरूरी होता है।
पासपोर्ट दिखाकर बोले- 'मैं भारतीय नागरिक हूं'
वीडियो में ध्रुव राठी ने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए भारतीय नागरिकता को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जर्मनी की नागरिकता नहीं ली है और उनके पास कोई विदेशी पासपोर्ट नहीं है। उन्होंने खुद को भारतीय नागरिक बताते हुए कहा कि उन्हें भी दूसरे भारतीय नागरिकों की तरह अपने अधिकार मिलने चाहिए। राठी ने कहा कि भारतीय होने के नाते उन्हें विरोध प्रदर्शन, मार्च और रैलियों में शामिल होने का अधिकार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को इतना नहीं डराना चाहिए कि उनके भीतर से डर ही खत्म हो जाए। न्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी देने के लिए सोनम वांगचुक का आभार भी जताया।
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अब पुलिस के जवाब पर नजर
ध्रुव राठी के आरोपों के बाद इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण हो गया है। उनके वीडियो में कार्रवाई के तरीके, कथित चोटों, फोन और वकील तक पहुंच तथा जंतर-मंतर जाने पर दी गई चेतावनी को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इन सवालों के जवाब के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कार्रवाई किस आदेश या कानूनी आधार पर हुई, संबंधित अधिकारियों ने क्या प्रक्रिया अपनाई और ध्रुव राठी को किन परिस्थितियों में रिहा किया गया।



















