पुलिसकर्मियों पर हमला केस : महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को कोर्ट ने दोषी माना, पांच जून को होगी सजा

नई दिल्ली।कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए गए प्रदर्शन से जुड़े मामले में उन्हें दोषी करार दिया है। इस मामले में अब 5 जून को सजा पर बहस होगी। अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अलका लांबा ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही ऐसे फैसले की उम्मीद थी, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं।
महिला आरक्षण आंदोलन से जुड़ा है मामला
यह मामला जुलाई 2024 का बताया जा रहा है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था। उस दौरान महिला कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर महिलाओं के लिए आरक्षण और सुरक्षा कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। अलका लांबा के अनुसार, वह अपनी महिला समर्थकों के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
फैसले के बाद अलका बोलीं- मैं डरूंगी नहीं
कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा कि यह कार्रवाई दबाव में की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन पर एफआईआर और चार्जशीट दर्ज कर दी थी। उन्होंने कहा, मैं डरने वालों में नहीं हूं। मुझे जो भी सजा देनी है दे दीजिए, लेकिन महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में महिलाएं सुरक्षा को लेकर परेशान हैं और ऐसे समय में यदि कोई उनकी आवाज उठाता है, तो उसे ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
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दिल्ली पुलिस ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग पर यातायात बाधित किया और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की। काफी समझाने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
वीडियो फुटेज बना अहम सबूत
इस मामले में अदालत ने घटना से जुड़ा वीडियो भी देखा था। कोर्ट ने पाया कि प्रदर्शन के दौरान अलका लांबा लोकसेवकों के काम में बाधा डालती दिखाई दे रही थीं। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना। अब सभी की नजर 5 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जिसमें यह तय होगा कि अदालत उन्हें क्या सजा सुनाती है। इस फैसले ने राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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