सीहोर का सरकारी स्कूल बना मिसाल:शिक्षकों ने जन्मदिन को बनाया सेवा अभियान, बदल दी स्कूल की तस्वीर

सीहोर। सरकारी विद्यालयों की बदली हुई तस्वीर का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है शासकीय माध्यमिक शाला कौड़ियाछीतू। यहां जन्मदिन केवल केक काटने या औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज, प्रकृति और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए समर्पित सेवा अभियान का रूप ले चुका है। प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना के नेतृत्व में सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने जन्मदिवस पर विद्यालय को उपयोगी उपहार देने की परंपरा शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप विद्यालय आज सर्वसुविधायुक्त और आकर्षक शिक्षण केंद्र बन गया है।
पौधारोपण से हरा-भरा हुआ परिसर
विद्यालय परिवार ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए प्रत्येक शिक्षक के जन्मदिन पर पौधारोपण किया। वर्षों पहले लगाए गए पौधे अब बड़े वृक्षों का रूप ले चुके हैं और पूरा विद्यालय परिसर हरियाली से आच्छादित दिखाई देता है। दो दर्जन से अधिक पौधों और गमलों ने परिसर की सुंदरता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण की भावना भी विकसित की है। विद्यालय का मानना है कि बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी तरीका व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत करना है।
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जन्मदिन के उपहार से बढ़ीं विद्यार्थियों की सुविधाएं
शिक्षकों ने अपने जन्मदिन पर विद्यालय के नौ कक्षों में पंखे लगवाए, जिससे भीषण गर्मी में भी छात्र-छात्राओं को अनुकूल वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। इसके अलावा 52 इंच और 42 इंच के दो एलईडी टीवी, बच्चों के लिए फर्नीचर, कुर्सियां, डस्टबीन, झूले और अन्य आवश्यक सामग्री भी विद्यालय को भेंट की गई। इन सुविधाओं ने विद्यालय के शिक्षण वातावरण को आधुनिक और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक बना दिया है।
बेहतर शिक्षा से बढ़ा सरकारी स्कूल पर भरोसा
विद्यालय में अच्छी पढ़ाई और नवाचारों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। पहले आओ, पहले पाओ योजना के तहत इस वर्ष शुरुआती 26 बच्चों को प्रवेश दिया गया। वर्तमान में विद्यालय में 196 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इस वर्ष 19 से अधिक विद्यार्थियों ने निजी विद्यालय छोड़कर शासकीय विद्यालय में प्रवेश लिया है। गांव कौड़ियाछीतू के लगभग 99 प्रतिशत बच्चे अब इसी सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो विद्यालय की बढ़ती साख का प्रमाण है।
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पूरे क्षेत्र के लिए बना प्रेरणादायी मॉडल
प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना ने बताया कि विद्यालय का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करना भी है। इस अभियान में शैलेंद्र सिंह, देवेंद्र चौहान, देवकरण मालवीय, शशिकला पांडे, फूलवती सेन, माधुरी जोशी और शशिवाला नामदेव सहित पूरा विद्यालय परिवार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। शिक्षकों की यह अनूठी पहल अब क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और यह संदेश दे रही है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो सरकारी विद्यालय भी संसाधनों और गुणवत्ता के मामले में नई पहचान बना सकते हैं।
Edited By: Rohit Sharma












