पुलिस टीम पर फायरिंग के दोषी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, उम्रकैद की सजा पर रोक और जमानत की दूसरी अर्जी खारिज

ग्वालियर। पुलिस टीम पर फायरिंग करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी शैतान सिंह को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से राहत नहीं मिली है। न्यायालय ने उसकी सजा निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की दूसरी अर्जी भी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने 10 जुलाई को इस मामले में आदेश पारित किया। मामले में शैतान सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307/34 के तहत उम्रकैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(अ) और 27 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा एक हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है।
पुलिसकर्मी के हाथ में लगी थी गोली
अभियोजन के अनुसार घटना के दौरान शैतान सिंह ने पुलिस टीम पर गोली चलाई थी। फायरिंग में पुलिसकर्मी शिवप्रताप के हाथ में गोली लगी थी। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि घटना में शैतान सिंह को भी दो गोलियां लगी थीं। इसलिए पुलिसकर्मियों को आरोपी और शैतान सिंह को शिकायतकर्ता माना जाना चाहिए था। इस दलील के समर्थन में डॉक्टर संतोष की गवाही का हवाला दिया गया।हालांकि, कोर्ट के सवाल पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि डॉक्टर की गवाही में बताई गई दूसरी चोट वास्तव में गोली का एग्जिट वाउंड था।
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शैतान सिंह पर दर्ज हैं 11 अन्य केस
वहीं राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए बताया गया कि शैतान सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड है और उसके खिलाफ 11 अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। मामले में बैलिस्टिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट भी अभियोजन के पक्ष में बताई गई। हाईकोर्ट ने केस रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद माना कि सजा निलंबित करने और आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही कोर्ट ने शैतान सिंह की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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