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CJI चंद्रचूड़ के घर पहुंचे PM मोदी, गणपति पूजा में हुए शामिल, संजय राउत बोले- अब हमें न्याय कैसे मिलेगा

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CJI चंद्रचूड़ के घर पहुंचे PM मोदी, गणपति पूजा में हुए शामिल, संजय राउत बोले- अब हमें न्याय कैसे मिलेगा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (11 सितंबर) को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के आवास पर आयोजित गणपति पूजा समारोह में शामिल हुए। उन्होंने CJI चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी के साथ मिलकर भगवान गणेश की आरती की। खास बात यह रही कि पीएम मोदी इस अवसर पर पारंपरिक मराठी वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने महाराष्ट्रियन टोपी पहनी हुई थी, जो गणेश पूजा की महाराष्ट्र में लोकप्रियता को दर्शाती है। मोदी ने X पर समारोह की तस्वीरें साझा की। जिसके बाद विभिन्न राजनीतिक और कानूनी हस्तियों ने इस मुलाकात पर अपनी प्रतिक्रिया दी। यह सामान्य धार्मिक कार्यक्रम अब राजनीतिक विवादों का कारण बन गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे भारतीय लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है।

खतरे में न्यायपालिका - प्रशांत भूषण

इस कार्यक्रम को लेकर पीएम मोदी के कट्टर आलोचक माने जाने वाले वकील प्रशांत भूषण की सबसे तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। भूषण ने ट्वीट कर कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने घर पर एक निजी बैठक के लिए आमंत्रित किया, यह एक चौंकाने वाली घटना है। उन्होंने इसे न्यायपालिका के लिए खतरा बताया और कहा कि न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह सरकार को संविधान के दायरे में काम करने के लिए बाध्य करे, न कि सरकार के साथ निजी संबंध बनाए। भूषण का मानना है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के प्रमुखों के बीच दूरी बनाए रखना जरूरी है ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई संदेह न हो।

विपक्षी पार्टियों ने जताया विरोध

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इस मुलाकात पर कड़ा ऐतराज जताया है। राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इस मुलाकात को लेकर उन्हें संदेह है कि उनकी पार्टी को न्याय मिलेगा या नहीं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) पार्टी से राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि उम्मीद है उत्सव खत्म होने के बाद CJI महाराष्ट्र में संविधान के अनुच्छेद 10 की घोर अवहेलना पर सुनवाई के लिए थोड़ा फ्री होंगे। समाजसेवी और वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधाश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन को लेकर समझौता किया है।

क्या है संवैधानिक दृष्टिकोण ?

पीएम मोदी और CJI चंद्रचूड़ की इस मुलाकात को लेकर उठे सवालों के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि, क्या कार्यपालिका और न्यायपालिका के प्रमुखों की मुलाकात संविधान के खिलाफ है ? संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा गया कि प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश एक दूसरे से नहीं मिल सकते। बल्कि, एक स्वस्थ लोकतंत्र में शक्तियों का अलगाव (सेप्रेशन ऑफ पावर) और शक्तियों का सहयोग (कोऑपरेशन ऑफ पावर) दोनों की आवश्यकता होती है। लोकतंत्र के इन दोनों स्तंभों में इतनी दूरी भी नहीं होनी चाहिए कि दोनों के बीच संवाद की कोई गुंजाइश ही न बचे।

मोदी सरकार के खिलाफ CJI के फैसले

CJI ने मोदी सरकार के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सुनवाई की हैं। यह सरकार की नीतियों पर उनके दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। इसमें समलैंगिक विवाह का मामला, महाराष्ट्र गवर्नर का मामला, सील कवर में प्रस्तुतियां, न्यायिक नियुक्तियां और चुनावी बॉन्ड्स के फैसले शामिल हैं।
Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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