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पीएम मोदी ने कराई प्राण प्रतिष्ठा, कहा- राम आग नहीं ऊर्जा हैं, होगा नए भारत का उदय

आज से दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र में मिलेंगी फ्री सुविधाएं
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पीएम मोदी ने कराई प्राण प्रतिष्ठा, कहा- राम आग नहीं ऊर्जा हैं, होगा नए भारत का उदय

अयोध्या से राजीव सोनी/ मयंक तिवारी/ हर्षित चौरसिया। सदियों की प्रतीक्षा के बाद रामधुन पर ठुमकती अयोध्या के नवनिर्मित भव्य मंदिर में अनुष्ठान के साथ भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो गई। आसमान से फूलों की बारिश के बीच रामलला विराजमान अयोध्या आ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर यजमान पूजन कार्यक्रम संपन्न कराया। उन्होंने इसे युगांतरकारी क्षण बताते हुए दार्शनिक अंदाज में कहा कि कालचक्र बदल रहा है। आज भारत के स्वाभिमान जगने का दिन भी है। मंदिर तो बन गया अब आगे क्या? इस पवित्र मौके पर हमें अगले एक हजार साल की नींव रखनी है।

उन्होंने न्याय की लाज रखने के लिए न्यायपालिका का आभार भी माना। डेढ़ घंटे के संबोधन में पीएम मोदी कई बार भावुक हुए, खुशी के आंसू भी छलके। मोदी दोपहर 12:05 मिनट पर चांदी का छत्र और लाल अंगवस्त्र लेकर राम मंदिर पहुंचे। इसके बाद कमल के फूल से पूजा-अर्चना की। भगवान राम के बालस्वरूप के दर्शन किए। प्राण- प्रतिष्ठा के बाद रामलला की आंखों से पट्टी हटाई। पूजा के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया। यहीं उन्होंने 11 दिन का विशेष अनुष्ठान व्रत खोला।

राम विश्व की आवश्यकता

पीएम बोले-कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी, ‘मेरा कहना है कि राम आग नहीं ऊर्जा हैं, विवाद नहीं समाधान हैं। हमारे नहीं सबके और वर्तमान नहीं अनंत हैं। राम तो सबके हैं। राम के आदर्श की आवश्यकता पूरे विश्व को है। वे देव मंदिर नहीं बल्कि दिग्दर्शन हैं। राम एक चेतना हैं, विधान हैं, प्रतिष्ठा हैं, प्रभा और राम प्रभाव हैं।

श्रमिकों पर बरसाए फूल

पीएम बोले-हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। राम आ गए हैं। उन्होंने भगवान राम से क्षमा भी मांगी कि हमारे पुरुषार्थ, त्याग-तपस्या में कमी रह गई होगी तभी तो इतनी सदियों तक यह कार्य नहीं हो पाया। पीएम ने मंदिर निर्माण करने वाले श्रमिकों पर फूल बरसाए। उन्होंने कहा कि आपने एक ऐसा काम किया है, जिसका सदियों से इंतजार किया जा रहा था।

राम राज्य के लिए तप करना है : डॉ. भागवत

आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में रामलला के साथ भारत का ‘स्व’ लौटा है। भारत विश्व गुरु बन जाएगा। पीएम मोदी तपस्वी हैं,उनके तप को नमन। हमें भी राम राज्य के लिए तप करना है। रामलला ने हमें प्रेरणा दी है कि युगानुकूल आचरण जरूरी है। कलह छोड़कर सामंजस्य बढ़ाएं।

हम भाग्यवान जो इस पल के साक्षी बन रहे :योगी

उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा-आज त्रेतायुगीन वैभव अयोध्या में उतर आया है। यह पुनर्जागरण के अनुष्ठान का राष्ट्र मंदिर भी है। हमारी पीढ़ी भाग्यवान है जो इस पल की साक्षी बन रही है।अयोध्या उपेक्षित व चोटिल होती रही, हमने धैर्य नहीं खोया। देश के हर मन में राम और रोम-रोम में राम रमे हैं।

रामलला के लिए पहुंचे उपहार

मध्यप्रदेश : बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से पांच लाख लड्डू आए। सिवनी से 300 क्विंटल चावल, कटनी और नरसिंहपुर से 61 क्विंटल दाल व 18 किलो धनियां आई।

छत्तीसगढ़ : भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से पांच किलो चांदी का पालना और 21 किलो चांदी की सामग्री आई। 31 चरण पादुका भी भेजी गई हैं। छग के किसानों ने101 टन सब्जी तो 300 टन चावल भेजा है। लड्डुओं का भोग लगाने के लिए चार हजार किलो दाल भी भेजी। श्री राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि देशभर से उपहार आए हैं, ऐसा कोई कोना नहीं है जहां से रामलला के लिए कोई न कोई उपहार नहीं आए हों।

मंदिर की सामग्री

मध्यप्रदेश : छतरपुर जिले से गिट्टी और ग्रेनाइट आया है।

महाराष्ट्र : मंदिर के दरवाजों की लकड़ी महाराष्ट्र से आई है, जबकि लकड़ी के काम के कारीगर कन्याकुमारी के हैं। दरवाजों पर चढ़ाया गया सोना मुंबई से पहुंचा।

राजस्थान : भरतपुर जिले से श्री राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर पहुंचाया गया है। मंदिर में लगने वाला सफेद रंग का मार्बल मकराना से अयोध्या पहुंचाया गया है।

वो सब कुछ जो आप जानना चाहते है

  • 23 जनवरी 2024 से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।
  • मंदिर सुबह 7 से दोपहर 11:30 बजे तक और दोपहर 2 से 7 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहेगा।
  • पहली आरती सुबह 6:30 बजे, दूसरी- दोपहर 12 बजे और तीसरी शाम 7:30 बजे होगी।
  • राम मंदिर की आरती में शामिल होने के लिए ‘पास’ अनिवार्य होगा। ‘पास’ श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिलेंगे।
  • एक बार में सिर्फ 30 लोग ही आरती में शामिल हो सकते हैं। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
  • राम मंदिर दर्शन करने अयोध्या जाने पर तीर्थ क्षेत्र में धर्मशालाएं, होटल, आश्रम और होम स्टे जैसी सुविधाएं ठहरने के लिए हैं।
  • ट्रस्ट के सुविधा केंद्र बनाए गए हैं, जहां फ्री मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली जा सकती है।
  • दर्शन करने से पहले मोबाइल फोन बाहर रखना होगा। फ्री लॉकर सुविधा उपलब्ध है।
  • वॉशरूम की सुविधाएं हैं और आराम करने के लिए शेड की सुविधा भी है।
  • असमर्थ वृद्ध, दिव्यांगजनों के लिए फ्री व्हीलचेयर की सुविधा। चालक लेते हैं तो शुल्क देना होगा।

राम नवमी पर सूर्य तिलक!

प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि हर साल ‘श्रीराम नवमी’ के दिन दोपहर के समय सूर्य की किरणें भगवान राम की मूर्ति के मस्तक पर लगभग 6 मिनट तक पड़े। उल्लेखनीय है कि श्रीराम नवमी, आमतौर पर मार्च-अप्रैल में हिंदू कैलेंडर के पहले महीने के नौवें दिन मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्मदिन का प्रतीक है।

अब ऐसे दिख रहे हैं रामलला

  • प्रभु श्रीराम पांच किलो के आभूषण धारण किए हैं। हाथों में धनुष-बाण हैं।
  • सोने का कवच कुंडल, करधन माला धारण की।
  • रत्न जड़ित मुकुट है। मुकुट नौ रत्न से सुशोभित हैं।
  • गले में सुंदर रत्नों की माला है। आभूषणों में रत्न, मोती, हीरे जडे हैं।
  • चरणों में वज्र, ध्वजा और अंकुश के चिह्न। पेट पर त्रिवली हैं।
  • विशाल भुजाएं आभूषणों से सुशोभित हैं।
  • छाती पर बाघ के नख की निराली छटा है।
  • छाती पर रत्नयुक्त मणियों के हार की शोभा है।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर बोले अतिथिआज का दिन अद्भुत है। भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद लौटे थे तो वशिष्ठ ऋषि बहुत भावुक थे। आज मेरी स्थिति वशिष्ठ ऋषि की स्थिति के समान है। मुझे और क्या कहना चाहिए। -जगद्गुरु रामभद्रचार्य

मैंने पहली बार नव्य मंदिर में प्रभु श्री भगवान के दर्शन किए। उनके दर्शन के बाद मेरा आधे घंटे तक अश्रुपात होता रहा। मैं पहली बार किसी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुआ हूं। अब राम राज्य का संकल्प लें। - योग गुरु बाबा रामदेव

हम कई वर्षों से यहां आते रहे हैं। अयोध्या नगरी जैसी वैभवपूर्ण होनी चाहिए वैसी हो गई है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह का अद्भुत नजारा है। मैं सौभाग्यशाली हूं जो आज इसका हिस्सा बना। मन भाव विभोर हो रहा है। - श्री श्री रविशंकर महाराज

यह मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है कि मेरे द्वारा बनाई गई मूर्ति का चयन हुआ। मैं अपने आपको भाग्यशाली मानता हूं। भव्य मंदिर में प्रभु श्रीराम विराजमान हो गए हैं। अब सभी प्रसन्न हैं। - अरुण योगीराज, मूर्तिकार

People's Reporter
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