भोपाल में फिजियोथैरेपिस्ट ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया है। मामला कटारा हिल्स की फॉर्चून सौम्या कॉलोनी का है। मामले में पुलिस के हाथ सुसाइड नोट लगा है इसमें मृतक फिजियोथेरेपिस्ट ने अपने आप से परेशान होकर सुसाइड करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने नोट में सभी लोगों से खुश रहने की बात कही है।
पुलिस ने जानकारी दी कि, फार्च्यून सौम्या अटलांटिस निवासी विवेक डेहरिया (40) पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट थे और निजी प्रैक्टिस करते थे। उनके फैमिली में पत्नी और दो साल की बेटी है, जबकि माता-पिता और अन्य परिवार के सदस्य बैतूल में रहते हैं। रविवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे उनकी पत्नी ने उन्हें कमरे में फांसी के फंदे पर लटका देखा।
पत्नी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तुरंत उन्हें फंदे से उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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बताया जा रहा है कि विवेक शनिवार रात करीब 8 बजे अपने क्लीनिक से घर लौटे थे। रात करीब 9 बजे पत्नी जब उन्हें खाना खाने के लिए बुलाने गईं, तब यह घटना सामने आई। आनन-फानन में दोस्तों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से विवेक का पूरा परिवार स्तब्ध है, हालांकि पुलिस जांच में कई जानकारी भी सामने निकल कर आ सकती है।
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पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें विवेक ने किसी को अपनी मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराया है। नोट में उन्होंने लिखा है कि वह अपनी निजी परेशानियों से तंग आकर यह कदम उठा रहे हैं और सभी से खुश रहने की अपील की है। हालांकि, उन्होंने अपनी परेशानी की असली वजह का खुलासा नहीं किया है।
अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई की और फिर मृतक के घर पहुंचकर जांच की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए बैतूल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और परिजनों के बयान दर्ज होने के बाद ही आत्महत्या के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
पिछले कुछ समय में भोपाल में प्रोफेशनल वर्ग के बीच बढ़ते तनाव और आत्महत्या के मामलों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अब विवेक के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और क्लीनिक स्टाफ से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के पीछे कोई आर्थिक या व्यक्तिगत दबाव तो नहीं था।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेज़ रफ्तार जिंदगी और बढ़ते दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना जरूरी हो गया है।