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ढाई साल पहले इलेक्शन मोड...हारी हुई सीटों पर अभी से नाम क्यों तलाश कर रही भाजपा  

भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम का चुनाव जीता 15 दिन भी नहीं हुए हैं और पार्टी ने फिर चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। मप्र में 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी अभी से चर्चा शुरू कर दी गई। इसके साथ ही अगले साल होने वाले स्थानीय निकायों के लिए भी पार्टी ने संगठन पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों को अलर्ट मोड पर कर दिया है।
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हारी हुई सीटों पर अभी से नाम क्यों तलाश कर रही भाजपा   
प्रशिक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ भाजपा पदाधिकारी

भोपाल। भाजपा संगठन ने प्रदेश मुख्यालय पर दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान आयोजित किया। इसमें पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों, विधायक, सांसदों को बुलाकर वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों के साथ ही अन्य विषयों पर बात की गई। उधर, संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मंत्रियों के परफॉर्मेंस पर बातचीत की। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने लगभग 20 मंत्रियों के साथ विस्तृत चर्चा की।

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हारी हुई सीटों पर नाम ढूंढने से बढ़ी जिज्ञासा

सत्ता और संगठन की इस पूरी कवायाद को प्रदेश में पार्टी के कामकाज की समीक्षा व चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, मंत्रियों से बातचीत के दौरान विधानसभा चुनाव में हारी हुई सीटों पर नए संभावित नामों की चर्चा भी की गई। इसी से पता चलता है कि पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए कितनी अलर्ट है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी को मिले जनसमर्थन बताता है कि भाजपा की तैयारी किस स्तर की होती है।

हर राज्य में एक जैसी तैयारी

भाजपा किसी भी चुनाव या राज्य को आसान नहीं मानती फिर वह असम, गुजरात, उप्र जैसे राज्य हो जहां भाजपा प्रचंड बहुमतों से जीतती है या फिर पश्चिम बंगाल जैसे विपरीत परिस्थितयों वाले राज्य। पार्टी की तैयारियां एक जैसी होती है। भोपाल में प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हुए एक पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी में प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है। हमारी पार्टी में साल के 365 दिन के लिए कार्यक्रम तय होते हैं। बूथ के कार्यकर्ता से लेकर सांसद- मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को भी संगठन संबंधी जिम्मेदारियां तय होती हैं। हम सिर्फ परीक्षा के समय 20 प्रश्न पढ़ने वाली विद्यार्थी नहीं हैं।

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2023 के चुनाव में 67 सीट भाजपा नहीं जीत सकी  

वर्ष 2023 के चुनाव में भाजपा ने 2018 के मुकाबले 36 सीटें ज्यादा जीतीं। पार्टी को कुल 163 सीटें मिलीं। जबकि कांग्रेस के खाते में 66 सीटें रहीं। एक सीट सैलाना में भारतीय आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार जीतकर कर आए। इस चुनाव में भाजपा के 12 मंत्री हार गए थे। ये थे ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, दतिया से नरोत्तम मिश्रा, परसवाड़ा से रामकिशोर दोगने, बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन, बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, पोहरी से सुरेश धाकड़, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, खरगापुर से राहुल सिंह लोधी, बड़वानी से प्रेमसिंह पटेल, अटेर से अरविंद सिंह भदौरिया और हरदा से कमल पटेल।

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क्या हारी सीटों पर नए प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे

भाजपा हारी सीटों पर नए नाम तलाश रही है लेकिन कुछ सीटों पर हारे हुए प्रत्याशी भी रिपीट हो सकते हैं। जैसे दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का निर्वाचन शून्य हो गया है। यहां उप चुनाव की तैयारी है, ऐसे में भाजपा से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही सशक्त उम्मीदवार माने जा रहे हैं। इसी तरह हरदा में कमल पटेल 870 वोटों से चुनाव हारे थे, उन्हें फिर से मौका मिल सकता है।  

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चुनावी तैयारी पर क्या कहते हैं भाजपा पदाधिकारी

चुनावों की तैयारी अभी से करने के बारे में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी 24*7 चुनाव के चिंतन को चुनाव प्रबंधन के नाम से संगठन में करती रहती है। आगामी नगरी निकाय चुनाव को लेकर हमारी तैयारियां शुरू हो चुकी है। अभी पार्टी में प्रशिक्षण शिक्षण और आंकलन का दौर चल रहा है जो शीघ्र ही पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद चुनावी तैयारी के लिए हम आगे बढ़ जाएंगे। रहा सवाल विधानसभा चुनाव का तो नगरीय निकाय चुनाव के होते ही प्रबंधन की दृष्टि से पार्टी मे विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो जाएगी। बावजूद इसके लगातार सरकार-संगठन अपना आंकलन जनता के बीच प्रत्येक सीट पर करता रहता है और जो आवश्यक कार्य है वह गतिविधियां भी हम जारी रखते हैं। 

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मंत्रियों के परफार्मेंस को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने क्या कहा 

  • बैठक में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में उनके प्रवास, संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी और संगठन से समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिलों में स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी सहित प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।
  • सरकार की योजनाओं और नीतियों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव है, इस पर मंत्रियों से फीडबैक लिया गया।
  • चुनाव के समय जनता से किए गए वादों पर सरकार की प्रगति का आंकलन किया गया।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से विभागों की उपलब्धियों और अब तक किए गए कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।
  • कोर कमेटी की बैठक भी वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई।
  • बैठक में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कार्यों को अधिक प्रभावी और समन्वित बनाने पर जोर दिया गया।
  • बैठक में मंत्रियों के कार्यों और उनके प्रदर्शन की सरकार स्तर पर समीक्षा की गई।
  • इस प्रशिक्षण में जनता से बेहतर संवाद, व्यवहार और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
  • संगठन से जुड़े विषयों पर मैं और पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारी संवाद करेंगे।
  • सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल और कार्यशैली पर लगातार फोकस किया जा रहा है।
Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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