जलती सड़कें, प्यास और लू...!सड़क पर तड़प रहे स्ट्रीट डॉग्स! क्या जानवरों के लिए भी जानलेवा होता है हीटस्ट्रोक?

भोपाल। भीषण गर्मी और लू सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर रहने वाले जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। स्ट्रीट डॉग्स और अन्य जानवरों के पास न तो छाया होती है, न पर्याप्त पानी, और न ही बचाव के संसाधन। ऐसे में उनका शरीर तेजी से डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक की चपेट में आ सकता है। पशु चिकित्सक एस. आर. नागर के अनुसार, थोड़ी सी जागरूकता और छोटा सा प्रयास किसी जानवर की जान बचा सकता है।
क्या जानवरों में भी हीट स्ट्रोक होता है?
डॉक्टर जवाब देते हैं हां, बिल्कुल। जानवरों में भी हीटस्ट्रोक (Heat Stroke) उतना ही खतरनाक होता है जितना इंसानों में। खासकर कुत्ते, जिनका शरीर पसीने से खुद को ठंडा नहीं कर पाता, वे जल्दी प्रभावित होते हैं। जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर उसे नियंत्रित नहीं कर पाता, तब हीटस्ट्रोक होता है।
एस. आर. नागर, पशु चिकित्सक भोपाल
कैसे शरीर का तापमान करते हैं नियंत्रित?
पशु चिकित्सक एस. आर. नागर के अनुसार, भीषण गर्मी और हीटवेव के दौरान जानवरों का शरीर इंसानों की तरह पसीना निकालकर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। जानवरों में पसीना बहुत कम मात्रा में निकलता है और वह मुख्य रूप से पंजों (paws) के जरिए ही कुछ हद तक शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं। इसके अलावा कुत्ते और अन्य जानवर अपनी जीभ (tongue) से तेज-तेज हांफकर (panting) शरीर की गर्मी को बाहर निकालते हैं और इसी प्रक्रिया से वे अपने शरीर का तापमान संतुलित रखने की कोशिश करते हैं।

डॉक्टर नागर बताते हैं कि जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो जानवरों की टॉलरेंस पावर यानी सहनशीलता कम हो जाती है। ऐसे में वे जल्दी थक जाते हैं, कमजोर महसूस करते हैं और उनका व्यवहार भी बदल सकता है। कई बार जानवर पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं और ज्यादा से ज्यादा छाया की ओर भागते हैं ताकि खुद को गर्मी से बचा सकें।
व्यवहार पर भी पड़ता है गर्मी का असर
हीटवेव की स्थिति में उनका नेचर भी प्रभावित होता है और कई बार उनमें चिड़चिड़ापन या हल्का आक्रामक व्यवहार (aggression) देखने को मिलता है। यह उनकी आदत नहीं होती, बल्कि गर्मी और तनाव का असर होता है। खासकर स्ट्रीट डॉग्स और खुले में रहने वाले जानवर सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं क्योंकि उन्हें न तो पर्याप्त पानी मिलता है और न ही छांव।
गर्म सड़कें कैसे नुकसान पहुंचाती हैं?
गर्मियों में सड़क का तापमान इतना बढ़ जाता है कि वह हीट प्लेट जैसा बन जाता है। इससे क्या होता है कुत्तों के पंजे जल सकते हैं, त्वचा पर जलन और छाले हो सकते हैं, चलने में दर्द और चोट। अगर आप खुद सड़क पर 5 सेकंड नंगे पैर नहीं रुक सकते, तो समझिए जानवरों के पंजों के लिए वह बहुत खतरनाक है।
हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
- अगर कोई जानवर इन लक्षणों को दिखाए, तो तुरंत सावधान हो जाएं-
- बहुत तेज और लगातार हांफना (Heavy Panting)
- जीभ बाहर निकालकर बहुत ज्यादा सांस लेना
- मसूड़ों का गहरा लाल या बैंगनी हो जाना
- अचानक कमजोरी या सुस्ती, जमीन पर बैठ जाना या गिर पड़ना
- ज्यादा लार टपकना, उल्टी या बेहोशी जैसी स्थिति
आम लोग कैसे बचा सकते हैं जानवरों की जान?
पशु चिकित्सकों के अनुसार, छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
- पानी जरूर रखें- घर, दुकान या बालकनी के बाहर एक कटोरा पानी रखें। इसे रोज बदलें ताकि पानी साफ और ठंडा रहे।
- छाया का इंतजाम करें- पेड़ की छांव, कार के नीचे या शेड जैसी जगहों पर जानवरों को थोड़ी राहत मिलती है।
- हल्का और हाइड्रेटिंग खाना दें- दही, छाछ या पानी मिला खाना उन्हें राहत देता है।
- बीमार जानवर दिखे तो तुरंत मदद करें- अगर कोई जानवर बेहोश, बहुत कमजोर या असामान्य लगे, तो नजदीकी वेटरनरी डॉक्टर से संपर्क करें।
- लोकल एनिमल ग्रुप्स से जुड़ें- रेस्क्यू और इलाज के लिए स्थानीय एनजीओ या पशु सहायता संस्थाओं की मदद लें।










