भोपाल। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 27 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को चुनाव प्रेक्षक के रूप में तैनात किया है। इन अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जा रहा है, जहां वे चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय का काम संभालेंगे।
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य के 27 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया है, जिन्हें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी भेजा जा रहा है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए मध्यप्रदेश के 27 IPS अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया है। इनमें पी. नरहरी, वंदना वैद्य, तरुण राठी, श्रीमन शुक्ल, प्रबल सिपाहा और अभिजीत अग्रवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य संबंधित राज्यों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए उनके विभागों का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारियों को सौंपा गया है। यह व्यवस्था इस तरह से बनाई गई है कि किसी भी विभाग का काम बाधित न हो और शासन की योजनाएं सुचारु रूप से चलती रहें। जिसके चलते सरकार ने फैसला लिया।

इस प्रशासनिक फेरबदल को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के साथ-साथ विभागीय प्रभार में बदलाव की जानकारी दी है।
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नियुक्त किए गए अधिकारी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत काम करेंगे और चुनाव प्रक्रिया की निगरानी, कानून-व्यवस्था और आचार संहिता के पालन पर नजर रखेंगे। बता दें कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आ गई है।
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आदेश के तहत प्रदेश के कई महत्वपूर्ण विभागों में अस्थायी रूप से जिम्मेदारियां बदली गई हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, तकनीकी शिक्षा, पंचायत राज, आदिवासी विकास, उच्च शिक्षा, नगरीय विकास, स्वास्थ्य, सहकारिता, कृषि, महिला एवं बाल विकास, पर्यटन और खनिज जैसे विभागों का अतिरिक्त प्रभार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया है।
यह पूरा फेरबदल न केवल चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए किया गया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मध्यप्रदेश में प्रशासनिक कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे।