Peoples Update Special :PHQ मेडिकल बिल घोटाला, दागी कर्मचारियों को मिला प्रमोशन; हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

विजय एस. गौर भोपाल। आरोप है कि पीएचक्यू की कार्मिक शाखा के 48 कर्मचारियों ने वर्ष 2018 से 2024 के बीच फर्जी मेडिकल बिल लगाकर भुगतान लिया। विभागीय जांच में गबन सिद्ध होने के बाद भी 21 कर्मचारियों को प्रमोशन मिल गया। अब हाईकोर्ट ने मामले में डीजीपी समेत संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया है।
घोटाले के दौरान उत्कृष्ट एसीआर, फिर मिला प्रमोशन
पुलिस मुख्यालय में जिस अवधि में करोड़ों का मेडिकल बिल घोटाला हुआ, उसी समयावधि में संलिप्त कर्मचारियों की एसीआर (वार्षिक चरित्रावली) में उत्कृष्ट लिखा गया। नतीजे में दागी होने के बाद भी उन्हें प्रमोशन मिल गया। हालांकि अब रिव्यू डीपीसी की जा रही है, ताकि दागी कर्मचारियों को प्रमोशन सूची से बाहर किया जा सके। पूरे मामले में विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
फैक्ट फाइल:मेडिकल बिल घोटाले की पूरी तस्वीर
घोटाला समय वर्ष 2018 से 2024 बताया गया है। अब तक 3.50 करोड़ रुपये की रिकवरी निकाली गई है, जबकि 25 लाख रुपये की राशि अभी तक नहीं मिली है। मामले में 48 कर्मचारी शामिल बताए गए हैं। 03 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हुई, 45 कर्मचारियों से रिकवरी की गई और 21 कर्मचारियों को प्रमोशन मिला। विशेष बात यह है कि घोटाले की कुल राशि का आकलन अभी भी जारी है।
48 कर्मचारियों पर आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
आरोप है कि पीएचक्यू की कार्मिक शाखा में पदस्थ 48 कर्मचारियों ने वर्ष 2018 से 2024 तक फर्जी मेडिकल बिलों के जरिए भुगतान लिया। जहांगीराबाद थाने में एफआईआर के बाद केवल तीन कर्मचारियों को जेल भेजा गया। बाकी 45 कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच में गबन सिद्ध होने के बाद भी उन्हें सरकारी राशि वापस जमा कराने की सुविधा दी गई। दूसरी ओर, प्रमोशन से वंचित कर्मचारियों की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डीजीपी और प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों से जवाब मांगा है।
21 कर्मचारियों के प्रमोशन पर उठा सवाल
कथित घोटाले में शामिल गौरव आरोनकर, स्नेहिल सिंह बैस, संदीप सूर्यवंशी, आरती चतुर्वेदी, मिथलेश उइके, विपिन रोतेल, आशीष अग्निहोत्री, प्रताप सिंह बामनिया, अंजू पन्द्राम, मंशाराम बघेल, अंतिमा जैन, पूनम सिंह बघेल, किरण पाण्डेय, भारती तिवारी, सरिता तिलवाने, राकेश कुमार त्रिपाठी, नरेश शर्मा, लीलाधार तिवारी, अपर्णा द्विवेदी, श्रीमती के. मिंज और पुरुषोत्तम राय को पदोन्नति मिलने के बाद विवाद शुरू हो गया। याचिका दायर होने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एसीएस होम, डीजीपी और प्रमोशन पाने वाले पुलिस कर्मचारियों से जवाब तलब किया है।
रिव्यू डीपीसी के जरिए रिकॉर्ड की हो रही जांच
पीएचक्यू प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में रिव्यू डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। आईजी एडमिन हरिनारायणचारी मिश्र के अनुसार रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि जिन दस्तावेजों की कमी है, उनके संबंध में क्वेरी की जा सके। साथ ही एक अलग डेस्क भी बनाई गई है, जहां दावों और आपत्तियों की सुनवाई की जा रही है। रिव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।












