पल्लवी वाघेला, भोपाल। कोविड या अन्य बीमारी के चलते जब मौत करीब नजर आई और खुद का परिवार नहीं था तो करीबी लगने वाले परिजन को संपत्ति सौंप दी। परिजन ने भरपूर सेवा की और जब वह ठीक हो गए तो यही संपत्ति झगड़े का कारण बन गई। इन दिनों ऐसे कुछ मामलों की शिकायत महिला आयोग पहुंची है। इस तरह के 11 मामलों में महिलाओं ने आयोग में आवेदन देकर मदद मांगी है। इसमें एक मामला साल 2023 का है। वहीं अन्य मामले बीते दो साल में आयोग में पहुंचे हैं। इनमें से चार मामलों में सुलह भी कराई गई है। दिलचस्प यह कि ज्यादातर मामलों में संपत्ति देने वाले बुजुर्ग हैं और जिन परिजन से विवाद चल रहा है उन्हीं के साथ उनके घर में रह रहे हैं।
भोपाल की रहने वाली महिला ने बताया कि मामा का परिवार न होने से वह सालों से उनका ध्यान रखती आई है। उन्होंने कहा कि यदि जीवित रहा तो तुम्हारे साथ ही रहूंगा। मकान के नवीनीकरण में बहुत पैसा खर्च हुआ। बाद में मामा मुकर गए और कहा कि केवल एक कमरा रहने को दूंगा।
लंग्स में इंफेक्शन की जानकारी मिलने के बाद इंदौर के एक बुजुर्ग को लगा कि वह अब नहीं बचेंगे। ऐसे में छोटे भाई की बहू उनकी सेवा में लगी रही। इस दौरान बुजुर्ग ने बहू को कॉस्मेटिक दुकान के लिए पैसे दिए। इस बीच बुजुर्ग की तबीयत में सुधार हो गया, तो बुजुर्ग ने दुकान में ताला डाल दिया।
विदिशा निवासी दंपति सालों से अविवाहित बुआ की सेवा कर रहे थे। एक सड़क दुर्घटना में बुआ को गंभीर चोट आई। अस्पताल में बुआ ने जमीन बहू के नाम कर दी। बहू की सेवा के बाद वह ठीक होकर घर आई। इसके बाद दंपति ने जमीन पर छोटा सा घर बना उसे किराए पर दे दिया। अब बुआ पूरा किराया रख लेती हैं और धमकाती है।
यदि कोई चीज दान पत्र के माध्यम से दान कर दी गई है तो दान पाने वाले उस पर अधिकार जता सकता है। इस तरह के मामले में कानून तथ्यों को ध्यान में रखकर निर्णय देता है।
विजय बहादुर सिंह तोमर, एडवोकेट