हिंद-प्रशांत में चीन को घेरने की तैयारी, पेंटागन ने चुनी USS कोलोराडो, 2027 में ऑस्ट्रेलिया के HMAS स्टर्लिंग में तैनात होगी पहली अमेरिकी सबमरीन

वॉशिंगटन। पेंटागन ने 'USS कोलोराडो' को पहली अमेरिकन नेवल सबमरीन के तौर पर चुना है, जो ऑस्ट्रेलिया में तैनात 'रोटेशनल फोर्स' का हिस्सा बनेगी। इससे हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में अमेरिका की मैरीटाइम मिलिट्री पोजिशन मजबूत होगी। क्योंकि, अमेरिका और उसके मित्र देश इस रीजन में चीन के बढ़ते नेवल इन्फ्लुएंस को रोकना चाहते हैं। एक जॉइंट स्टेटमेंट के अनुसार, US डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी PM और डिफेंस मिनिस्टर रिचर्ड मार्लेस तथा ब्रिटिश डिफेंस सेक्रेटरी जॉन हीली के साथ मिलकर इस सिलेक्शन का अनाउंसमेंट किया।
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अमेरिका और ब्रिटेन की और सबमरीन शामिल हो सकती हैं
वर्जीनिया-क्लास की 'USS कोलोराडो' (एक फास्ट-अटैक सबमरीन) 2027 के अंत में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के HMAS स्टर्लिंग में 'सबमरीन रोटेशनल फोर्स-वेस्ट' (SRF-West) में शामिल होगी। इस रोटेशनल फोर्स में अमेरिका की चार फास्ट-अटैक सबमरीन और ब्रिटेन की एक सबमरीन शामिल हो सकती हैं। इससे इंडो-पैसिफिक रीजन में अलाइड मैरीटाइम ऑपरेशंस के लिए मेंटेनेंस और सपोर्ट फैसिलिटीज का एक्सपेंशन होगा। यह अरेंजमेंट 'ऑकस' (AUKUS) का हिस्सा है, जो 2021 में ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के बीच बनी एक ट्राइलेटरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप है।
ऑस्ट्रेलिया को अपनी न्यूक्लियर पावर्ड फ्लीट तैयार करना है
'ऑकस' का मकसद ऑस्ट्रेलिया को कन्वेंशनल वेपन्स से लैस, न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन की अपनी फ्लीट डेवलप करने में मदद करना है। साथ ही इन तीनों मित्र देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। इस कदम का बड़ा सामरिक प्रभाव भी हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वॉशिंगटन रीजनल डिटरेंस को मजबूत करना चाहता है और पैसिफिक रीजन में चीन की मिलिट्री प्लानिंग को कठिन बनाना चाहता है।
प्रशांत क्षेत्र में चीन कर रहा विस्तार
चीन ने पैसिफिक क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक, आर्थिक और रक्षा उपस्थिति को लगातार बढ़ाया है। इससे उस रीजन में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के पारंपरिक प्रभाव को चुनौती मिल रही है। यह उनकी डिफेंस प्लानिंग के लिहाज से बेहद अहम है। जून 2026 में 'ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट' (ASPI) की एक रिपोर्ट, 'प्रेशर पॉइंट्स पार्ट 3' में कहा गया है कि बीजिंग दक्षिण-पश्चिम पैसिफिक और ऑस्ट्रेलिया के मैरीटाइम एरियाज में मिलिट्री एक्सेस, सिक्योरिटी कोऑपरेशन और रीजनल इन्फ्लुएंस का एक व्यापक नेटवर्क बुन रहा है।
USS कोलोराडो के बारे में जानें
USS कोलोराडो (SSN 788) US नेवी की वर्जीनिया-क्लास ब्लॉक III न्यूक्लियर-पावर्ड फास्ट-अटैक सबमरीन है। इसे 2018 में कमीशन किया गया था। 377 फीट लंबी और लगभग 7,800 टन डिस्प्लेसमेंट वाली ये सबमरीन पानी के नीचे 25 नॉट (लगभग 46 किमी/घंटा) से ज्यादा की स्पीड से चल सकती है। ये एक न्यूक्लियर रिएक्टर द्वारा पावर्ड होती है और इसे बार-बार फ्यूल भरे बिना लंबे समय तक मिशन चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।
टॉमाहॉक मिसाइलों से लैस है पनडुब्बी
इस सबमरीन के वेपन्स में दो बड़े डायमीटर वाले 'वर्जीनिया पेलोड ट्यूब' शामिल हैं। हर ट्यूब से छह 'टॉमाहॉक क्रूज मिसाइलें' फायर की जा सकती हैं। इससे इन ट्यूब्स के जरिए कुल 12 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। इसमें चार टॉरपीडो ट्यूब भी हैं, जिनसे दुश्मन की सबमरीन और सरफेस शिप्स के खिलाफ 'Mk 48 एडवांस्ड कैपेबिलिटी' टॉरपीडो फायर किए जा सकते हैं। इन क्षमताओं की मदद से USS कोलोराडो प्रिसीजन स्ट्राइक्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और अंडरसी कॉम्बैट ऑपरेशंस को अंजाम दे सकती है।
यह भी कर सकती है सबमरीन
वेपन्स के अलावा, USS कोलोराडो को इंटेलिजेंस गैदरिंग, सर्विलांस, रेकी और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज को सपोर्ट प्रोवाइड करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी 'स्टेल्थ' कैपेबिलिटी, एंड्योरेंस और स्ट्राइक पावर का कॉम्बिनेशन इसे अंडरसी लॉन्ग-ड्यूरेशन मिशन के लिए एक बेहद वैल्युएबल एसेट बनाता है।




















