ईरान में सत्ता के सबसे बड़े पद सुप्रीम लीडर को लेकर अहम फैसला हो चुका है। देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया है, लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर चुने गए व्यक्ति के नाम का ऐलान नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संस्था के अधिकांश सदस्यों ने एक उम्मीदवार के नाम पर सहमति बना ली है।
हालांकि, सुरक्षा कारणों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते नाम को सार्वजनिक करने में सावधानी बरती जा रही है। इसी बीच इजरायल ने कड़ी चेतावनी दी है कि, अयातुल्ला अली खामेनेई के किसी भी उत्तराधिकारी को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद मध्य-पूर्व में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ गया है।
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन देश की धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। यह 88 सदस्यीय निकाय है, जिसे सीधे जनता द्वारा चुना जाता है और इसका मुख्य काम सुप्रीम लीडर की योग्यता की समीक्षा करना और आवश्यकता पड़ने पर नए नेता का चुनाव करना होता है। अलजजीरा और ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की बैठक में लंबे विचार-विमर्श के बाद नए सुप्रीम लीडर के नाम पर सहमति बन गई है।
खुजेस्तान प्रांत से असेंबली के सदस्य मोहसिन हेदरी ने इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (ISNA) को बताया कि सभी संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा के बाद बहुमत से सबसे योग्य व्यक्ति के नाम को मंजूरी दे दी गई है। असेंबली के एक अन्य सदस्य मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी ने भी इसकी पुष्टि की है। फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि संस्था के अधिकांश सदस्यों की राय के आधार पर स्पष्ट फैसला लिया जा चुका है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुप्रीम लीडर के रूप में किसे चुना गया है।
ईरानी अधिकारियों ने नए सुप्रीम लीडर का नाम सार्वजनिक करने में देरी के पीछे कई कारण बताए हैं।
1. सुरक्षा कारण
इजरायल ने खुलकर धमकी दी है कि खामेनेई के उत्तराधिकारी को भी निशाना बनाया जाएगा। ऐसे में संभावित नेता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नाम को फिलहाल गुप्त रखा गया है।
2. सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सत्ता हस्तांतरण को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयारी की जा रही है।
3. व्यापक सहमति बनाना
ईरानी नेतृत्व चाहता है कि नए सुप्रीम लीडर की घोषणा ऐसे समय की जाए जब देश के राजनीतिक और धार्मिक संस्थानों के बीच पूरी सहमति हो।
नए सुप्रीम लीडर के चयन को लेकर पहले कई नामों की चर्चा चल रही थी। इनमें सबसे प्रमुख नाम मुजतबा खामेनेई का बताया जा रहा था, जो दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। मुजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था में प्रभावशाली माने जाते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि असेंबली के कई सदस्य उन्हें सुप्रीम लीडर बनाने के पक्ष में थे।
हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया था कि अमेरिका मुजतबा खामेनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में स्वीकार नहीं करेगा।
नए सुप्रीम लीडर के चयन की खबर सामने आने के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजराइली सेना (IDF) ने सोशल मीडिया पर फारसी भाषा में जारी बयान में कहा कि खामेनेई के हर संभावित उत्तराधिकारी को निशाना बनाया जाएगा।
इजरायल का कहना है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जो भी व्यक्ति उनकी जगह लेगा, वह भी उनके निशाने पर होगा। इजराइली सेना ने उन लोगों को भी चेतावनी दी है जो नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में शामिल हैं। इस बयान ने ईरान और इजरायल के बीच चल रहे टकराव को और अधिक गंभीर बना दिया है।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान में बड़े पैमाने पर नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है। ईरान की राहत संस्था ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) के मुताबिक अब तक हजारों नागरिक इमारतें नष्ट हो चुकी हैं।
संस्था के अनुसार, 7,943 रेसिडेंशियल बिल्डिंग और 1,617 कमर्शियल बिल्डिंग इन हमलों में पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। इसके अलावा हजारों घर, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने नागरिक ढांचे पर हमलों को लेकर चिंता जताई है और इसकी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
[featured type="Featured"]
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष में अब तक कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि, युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है।
28 फरवरी
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा संयुक्त हमला शुरू किया। इस ऑपरेशन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत।
इसके बाद
ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। पूरे इजरायल में इमरजेंसी लागू की गई।
2 मार्च
अमेरिका ने B-2 बॉम्बर्स से ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हमला किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का लगभग 50% मिसाइल स्टॉक नष्ट हो गया।
अन्य घटनाएं
कुवैत में फ्रेंडली फायरिंग में 3 अमेरिकी फाइटर जेट गिराए गए।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में तनाव: अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध, अब तक रूस और चीन ने क्यों साधी चुप्पी ?
ईरान और इजरायल के बीच युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि, यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो ऊर्जा बाजार में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। इस संस्था की जिम्मेदारियां होती हैं-
यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान की विशेषज्ञ जहरा खराजमी के मुताबिक इस प्रक्रिया को पूरी तरह संविधान के अनुसार किया जा रहा है और इसमें किसी अन्य संस्था का सीधा हस्तक्षेप नहीं है।