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पन्ना:पटवारी पर आदिवासियों और किसानों की जमीन हड़पने का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

पन्ना जिले की शाहनगर तहसील के गांव लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत कर आदिवासियों और किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने, नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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पटवारी पर आदिवासियों और किसानों की जमीन हड़पने का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

पन्ना। ग्राम लमतरा के ग्रामीणों ने राजस्व और वन विभाग के कर्मचारियों पर जमीन संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से खेती की जा रही जमीन पर बुलडोजर चलाकर नुकसान पहुंचाया गया है। साथ ही वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों और राजस्व अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग भी की गई है।

कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राजस्व और वन विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासियों और किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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बुलडोजर से खेतों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार वे वर्षों से संबंधित जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि हाल ही में जेसीबी मशीन चलवाकर खेतों की मेड़, बाउंड्रीवॉल और अन्य जगहों को नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले को लेकर 7 जून को गांव में महापंचायत भी आयोजित की गई थी। इसके बाद नायब तहसीलदार को भी ज्ञापन सौंपा गया था।

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जीवित व्यक्ति को दिखाया मृत 

ज्ञापन में एक गंभीर अनियमितता का जिक्र भी किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील कार्यालय से जारी प्रतिवेदन में बालाप्रसाद परोहा को मृत दिखाकर उनकी पत्नी ममता बाई के नाम जमीन का पट्टा जारी कर दिया गया। जबकि ग्रामीणों के अनुसार बालाप्रसाद परोहा जीवित हैं। इसे राजस्व अभिलेखों में गंभीर गड़बड़ी बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

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वन अधिकार दावा आवेदन को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने आदिवासी परिवारों से वन अधिकार दावा आवेदन की मूल पावतियां लेकर अपने पास रख लीं। उनका कहना है कि अब ये दस्तावेज वापस नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, वहां वन विभाग नर्सरी बनाने की तैयारी कर रहा है। इससे आदिवासी परिवारों में चिंता बढ़ गई है।

लंबित दावों के निराकरण और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्तुत दावे पिछले डेढ़ वर्ष से लंबित हैं। आरोप है कि दावों के निराकरण से पहले ही कई स्थानों पर आदिवासी परिवारों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। ज्ञापन में खेतों, मेड़ों और फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने, मूल पावतियां वापस दिलाने और लंबित दावों का नियमानुसार निराकरण करने की मांग की गई है। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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