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CG NEWS:छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब 16 जून नहीं, 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र।

सीबीएसई की तर्ज पर लागू होगी नई व्यवस्था, ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी के लिए 31 जुलाई तक चलेगा विशेष अभियान प्रदेश में अब तक सीजी बोर्ड के स्कूलों में नया सत्र जून के मध्य से शुरू होता था, जबकि सीबीएसई स्कूल अप्रैल से पढ़ाई शुरू कर देते थे। इस अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार ने नया शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब 16 जून नहीं, 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र।

RAIPUR NEWS। छत्तीसगढ़ की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अगले साल से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के सभी सरकारी और सीजी बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों में अब नया शैक्षणिक सत्र 16 जून के बजाय 1 अप्रैल से शुरू होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार का दावा है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी और परीक्षा परिणाम बेहतर होंगे।

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सत्र परिवर्तन का बड़ा फैसला

प्रदेश में अब तक सीजी बोर्ड के स्कूलों में नया सत्र जून के मध्य से शुरू होता था, जबकि सीबीएसई स्कूल अप्रैल से पढ़ाई शुरू कर देते थे। इस अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार ने नया शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।

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31 मार्च तक जारी होंगे परीक्षा परिणाम

नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वार्षिक परीक्षा के परिणाम हर हाल में 31 मार्च तक जारी किए जाएं। इससे 1 अप्रैल से नई कक्षाओं का संचालन बिना किसी बाधा के शुरू किया जा सकेगा।

ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी पर फोकस

बैठक में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि 31 जुलाई तक ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाए।

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हाई स्कूल स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में कमी आई है, लेकिन हाई स्कूल स्तर पर अभी भी 15.3 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं। आर्थिक तंगी और सामाजिक कारणों को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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