इस्लामाबाद। दक्षिण एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है। हवाई हमले, सीमा चौकियों पर कब्जे के दावे, फाइटर जेट गिराए जाने की खबरें और बड़े स्तर पर जवाबी ऑपरेशन इन सबने हालात को बेहद नाजुक बना दिया है। कतर की मध्यस्थता में हुआ युद्धविराम अब टूटने की कगार पर है। दोनों देशों की सरकारें सख्त बयान दे रही हैं और सीमाई इलाकों में लगातार गोलीबारी की खबरें आ रही हैं।
शुक्रवार देर रात पाकिस्तान वायुसेना ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांत में एयर स्ट्राइक की। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, ये हमले खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए और इनका लक्ष्य तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े ठिकाने थे।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए दावा किया कि इनमें महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक मारे गए। नंगरहार प्रांत में एक घर पर हमले के बाद एक ही परिवार के 20 से अधिक लोगों के मारे जाने का दावा भी किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि उसके हमले सटीक और आतंकवादी ठिकानों तक सीमित थे।
एयर स्ट्राइक के कुछ ही घंटों के अंदर तालिबान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि, पकतिका, पकतिया, खोस्त, कुनार, नूरिस्तान और नंगरहार इलाकों में पाकिस्तानी सेना को पीछे धकेल दिया गया। अफगान पक्ष के अनुसार, इस कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 19 सीमा चौकियों और 2 सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया गया, जबकि कई सैनिकों को बंदी भी बनाया गया।
हालांकि, पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और तालिबान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
इस बीच पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में गजब-ए-हक नाम से ऑपरेशन शुरू करने की घोषणा की। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि, यह ऑपरेशन सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी हमले को रोकने के उद्देश्य से चलाया गया। सेना के मुताबिक, इस कार्रवाई में 130 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए, 200 से ज्यादा घायल हुए, 27 चौकियां तबाह की गईं और 9 पोस्ट पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
वहीं अफगानिस्तान ने इन दावों को अतिशयोक्ति (बढ़ा-चढ़ाकर बताना) करार दिया है। दोनों देशों के आधिकारिक आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे वास्तविक नुकसान को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
यह भी पढ़ें: PoK खाली करो…! भारत ने UN में दिखाया आईना, बोला- पाकिस्तान को मिले IMF बेलआउट से दोगुना है कश्मीर का बजट
अफगानिस्तान ने दावा किया है कि, उसने पाकिस्तान का एक फाइटर जेट मार गिराया है। तालिबान लड़ाकों ने इसे एयर स्ट्राइक का जवाब बताया है। पाकिस्तान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह संघर्ष को और अधिक गंभीर स्तर पर ले जा सकता है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि देश की क्षेत्रीय अखंडता और शांति से कोई समझौता नहीं होगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बयान दिया कि, पाकिस्तानी सेना किसी भी आक्रामक शक्ति को तेजी से कुचल सकती है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा- अब खुला युद्ध शुरू हो चुका है।
दूसरी ओर, तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।
अफगान सेना प्रमुख कारी फसीहुद्दीन फितरत ने खुद युद्ध की कमान संभालने की घोषणा की है और कहा है कि वे सीधे सैन्य अभियानों की निगरानी कर रहे हैं।
नंगरहार, कुनार, खोस्त, पकतिया और पक्तिका जैसे क्षेत्रों में अभी भी गोलीबारी जारी है। राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार में जेट विमानों की आवाज और विस्फोटों की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने भी की है। कंधार तालिबान नेतृत्व का अहम केंद्र है, जिससे इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधि और भी संवेदनशील हो जाती है।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक : TTP के ठिकानों को बनाया निशाना, कई लोगों की मौत
दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद की जड़ डूरंड लाइन है।
डूरंड लाइन क्या है?
डूरंड लाइन का समझौता 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत लगभग 2,430 से 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा निर्धारित की गई, जिसने पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया। यही वजह है कि यह सीमा शुरू से ही विवाद का विषय रही। अफगानिस्तान ने कभी भी इसे औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। 1947 में पाकिस्तान के गठन के बाद यह विवाद और गहरा गया। वर्तमान में तालिबान सरकार भी डूरंड लाइन को आधिकारिक सीमा मानने से इनकार करती रही है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनाव की स्थिति बनी रहती है।
पाकिस्तान का आरोप है कि, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि हालिया आत्मघाती हमलों के पीछे यही नेटवर्क है।
हाल के महीनों में-
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर दबाव बढ़ाया कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी संगठनों को न करने दे। तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
कतर की मध्यस्थता से पहले युद्धविराम हुआ था, लेकिन वह औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सका। अब हालिया घटनाओं के बाद वह समझौता खतरे में है।
|
पक्ष |
प्रमुख ताकतें |
|
पाकिस्तान |
आधुनिक वायुसेना |
|
|
उन्नत हथियार प्रणाली |
|
|
संगठित सैन्य ढांचा |
|
|
परमाणु शक्ति |
|
तालिबान (अफगानिस्तान) |
पहाड़ी इलाकों का अनुभव |
|
|
गुरिल्ला युद्ध रणनीति |
|
|
स्थानीय समर्थन नेटवर्क |
विशेषज्ञों का मानना है कि, पारंपरिक और खुली जंग की स्थिति में पाकिस्तान की सैन्य ताकत उसे बढ़त दे सकती है। हालांकि, लंबी सीमा पर लंबे समय तक चलने वाले छिटपुट संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध की स्थिति तालिबान के पक्ष में जा सकती है।