पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक :TTP के ठिकानों को बनाया निशाना, कई लोगों की मौत

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर घुसकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और ISKP के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान का दावा है कि, यह हालिया आत्मघाती हमलों का जवाब था, जबकि अफगानिस्तान ने नागरिकों की मौत और संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
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TTP के ठिकानों को बनाया निशाना, कई लोगों की मौत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा एक बार फिर गोलियों और धमाकों की गूंज से दहल उठी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। रविवार तड़के पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमला कर दिया। इस्लामाबाद का दावा है कि यह कार्रवाई तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई, जो हालिया आत्मघाती हमलों के लिए जिम्मेदार थे।

    वहीं अफगानिस्तान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए नागरिकों की मौत का आरोप लगाया है। इस कार्रवाई के बाद दक्षिण एशिया में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है। 

    अफगानिस्तान में कहां-कहां हुई एयरस्ट्राइक

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमल और अर्गुन जिलों को निशाना बनाया। इसके अलावा नंगरहार प्रांत में भी कई हवाई हमलों की खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, बरमल इलाके में एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुने गए, जिससे यह साफ होता है कि हमला एक समन्वित सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा था।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने कुल सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इन ठिकानों का इस्तेमाल सीमा पार से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था।

    पाक का दावा- इंटेलिजेंस-बेस्ड टारगेटेड ऑपरेशन

    पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि, यह कार्रवाई इंटेलिजेंस-बेस्ड और सटीक सैन्य ऑपरेशन थी। सरकार के अनुसार-

    • TTP और इस्लामिक स्टेट से जुड़े 7 आतंकी कैंप तबाह किए गए।
    • इन ठिकानों से पाकिस्तान में आत्मघाती हमलों की योजना बनाई जा रही थी।
    • हमले केवल आतंकी ठिकानों पर किए गए, नागरिक इलाकों को निशाना नहीं बनाया गया।

    पाकिस्तान का कहना है कि, उसके पास पुख्ता सबूत हैं कि हालिया हमले अफगानिस्तान की जमीन से संचालित नेटवर्क द्वारा कराए गए।

    एयरस्ट्राइक से पहले पाकिस्तान में क्या हुआ था

    इस सैन्य कार्रवाई से कुछ घंटे पहले ही पाकिस्तान में दो बड़े आतंकी हमले हुए थे।

    बन्नू आत्मघाती हमला

    खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। मृतकों में एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल थे।

    बाजौर में कार बम धमाका

    सोमवार को बाजौर जिले में विस्फोटकों से भरी गाड़ी एक सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई। इस हमले में 11 सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही एक बच्चे की भी जान गई। पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया।

    इस्लामाबाद शिया मस्जिद हमला

    इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान एक शिया इमामबाड़े में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हुई और 169 लोग घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली।

    इन लगातार हमलों के बाद पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई का भारी दबाव था।

    अफगानिस्तान का आरोप- नागरिकों-मदरसों को बनाया निशाना

    हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से शुरुआती घंटों में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने दावा किया है कि,

    • पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल (मदरसा) पर ड्रोन हमला हुआ।
    • नंगरहार में रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा।
    • 19 आम नागरिकों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

    तालिबान सरकार ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताया और कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं को छिपाने के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल कर रहा है।

    क्यों बिगड़ते जा रहे पाक-अफगानिस्तान रिश्ते

    2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि, TTP को अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने मिले हुए हैं। वहीं से पाकिस्तानी सेना और नागरिकों पर हमले कराए जा रहे हैं। दूसरी ओर तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

    दोहा समझौता और पाकिस्तान की मांग

    पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए दोहा समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले। इस समझौते में तालिबान ने वादा किया था कि-

    • अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होगा।
    • अल-कायदा और अन्य आतंकी संगठनों से संबंध तोड़े जाएंगे।

    अमेरिका ने इसी समझौते के बाद 2021 में अपनी सेना वापस बुला ली थी, जिसके बाद तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया।

    अक्टूबर की झड़पें और बढ़ता तनाव

    पिछले साल अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों ओर सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई थी। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम जरूर हुआ, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में हुई वार्ता किसी औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी।

    पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा क्यों बना TTP

    अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी हिंसक गतिविधियों को तेज कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, TTP ने इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर गुरिल्ला हमलों की रणनीति अपनाई, जिससे देश में आतंकी घटनाओं में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, साल 2015 के बाद पाकिस्तान में आतंकी हमले अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं और इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी भूमिका TTP की ही मानी जा रही है।

    TTP पर लगे बड़े आरोप

    2007: बेनजीर भुट्टो की हत्या में हाथ होने का आरोप

    2008: इस्लामाबाद मैरियट होटल बम धमाका

    2012: मलाला यूसुफजई पर हमला

    2014: पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल हमला (150 मौतें, 137 बच्चे)

    इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स के मुताबिक, 83 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों की मौत के लिए TTP को जिम्मेदार माना जाता है।

    ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान

    ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस समय दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आतंकवाद से प्रभावित देश बन चुका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि, देश में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े हमलों में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    साल 2024 के दौरान TTP ने कुल 482 आतंकी हमलों को अंजाम दिया, जिनमें 558 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बढ़ते हमलों ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है और आतंकवाद एक बार फिर देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।

    सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके:

    • खैबर पख्तूनख्वा
    • बलूचिस्तान

    डूरंड लाइन: 132 साल पुराना विवाद

    • डूरंड लाइन समझौता 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच हुआ था।
    • लंबाई: 2430 किमी
    • अफगान पख्तून समुदाय दो हिस्सों में बंटा
    • तालिबान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानने से इनकार करता है
    • यही विवाद दोनों देशों के बीच लगातार तनाव की जड़ बना हुआ है।

    यह भी पढ़ें: दिल्ली में हो सकता है आतंकी हमला! लाल किला और चांदनी चौक के मंदिर पर लश्कर-ए-तैयबा की नजर, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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