NCERT का बड़ा फैसला!9वीं की किताब में पढ़ाया जाएगा आपातकाल का पूरा सच

25 जून 1975 का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसे दिन के रूप में दर्ज है, जिसे लोकतंत्र के सबसे कठिन और विवादित दौर की शुरुआत माना जाता है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। यह दौर करीब 21 महीने तक चला और मार्च 1977 में समाप्त हुआ। इस दौरान देश में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों पर पड़ा।
आज देशभर में संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को उस समय की घटनाओं और लोकतंत्र पर पड़े प्रभाव की याद दिलाना है। इसी बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एक बड़ा कदम उठाया है। NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताबमें आपातकाल पर एक अलग अध्याय शामिल किया है।
लोकतंत्र के लिए चुनौती नाम से जोड़ा गया अध्याय
NCERT की नई सामाजिक विज्ञान की किताब 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में आपातकाल पर विशेष अध्याय जोड़ा गया है। इस अध्याय का नाम 'लोकतंत्र के लिए चुनौती' रखा गया है। इसमें छात्रों को बताया जाएगा कि आपातकाल के दौरान देश में क्या परिस्थितियां थीं और इसका लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा।
NCERT के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब कक्षा 9 की पाठ्यकिताबमें आपातकाल पर अलग से अध्याय शामिल किया गया है। इससे पहले इस विषय का सीमित उल्लेख किया जाता था, लेकिन अब छात्रों को इसके बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।
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आखिर क्यों लगाया गया था आपातकाल?
किताबमें बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में देश में कई समस्याएं बढ़ रही थीं। बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के कामकाज को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज हो रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों के बीच 25 जून 1975 को देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया। सरकार ने इसके लिए 'आंतरिक अशांति' को आधार बताया था। इसके बाद देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव देखने को मिले।
नागरिकों के अधिकारों पर पड़ा असर
नई किताबमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के कई मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था। लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई।
उस समय अखबारों और मीडिया संस्थानों को सरकार की अनुमति के बिना समाचार प्रकाशित करने की छूट नहीं थी। कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विरोधी दलों के सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
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जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र
NCERT की किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण यानी जेपी की भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। किताब के अनुसार, जयप्रकाश नारायण ने उस समय सरकार के खिलाफ चल रहे जन आंदोलनों का नेतृत्व किया था।
विशेष रूप से बिहार और गुजरात में छात्रों और आम नागरिकों ने उनके नेतृत्व में बड़े आंदोलन किए। इन आंदोलनों ने देशभर में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर नई जागरूकता पैदा की। जेपी का मानना था कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उनके नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन उस समय देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आए।
1977 के चुनाव ने बदल दी तस्वीर
किताबमें बताया गया है कि मार्च 1977 में आपातकाल समाप्त किया गया और देश में आम चुनाव कराए गए। इन चुनावों में जनता को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर मिला।
चुनाव परिणामों में तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार को हार का सामना करना पड़ा। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है। इससे यह संदेश गया कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है और मतदाता अपने वोट के माध्यम से सरकारों को बदल सकते हैं।
छात्रों को समझाया जाएगा लोकतंत्र का महत्व
NCERT का मानना है कि छात्रों को देश के इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्यों की सही जानकारी देना जरूरी है। इसलिए नई किताब में आपातकाल को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सामने आई एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस अध्याय के माध्यम से छात्रों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि लोकतंत्र में नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मजबूत संस्थाएं कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी और जागरूकता क्यों जरूरी है।
लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बना भारत
आपातकाल का दौर भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। हालांकि यह समय लोकतंत्र के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन 1977 के चुनावों ने यह साबित कर दिया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है।
नई NCERT किताबमें इसी संदेश को प्रमुखता से रखा गया है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता में होती है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी पहचान को मजबूत किया।











