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फिर कांपी भारत की जमीन!जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय में में महसूस हुए भूकंप के झटके

भारत के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जबकि असम के गोलपाड़ा में 3.7 और मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में 2.9 तीव्रता के झटके महसूस हुए। राहत की बात यह रही कि किसी भी क्षेत्र से जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। 
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जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय में में महसूस हुए भूकंप के झटके

दुनियाभर के कई देशों में गुरुवार को भूकंप के तेज और हल्के झटके महसूस किए गए। दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला से लेकर जापान और भारत तक कई इलाकों में धरती हिलने से लोगों में दहशत फैल गई। सबसे ज्यादा नुकसान वेनेजुएला में हुआ, जहां दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी। वहीं भारत में जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि भारत में कहीं से भी जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।

जम्मू-कश्मीर में रात को हिली धरती

भारत में भी गुरुवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुबह करीब 2:30 बजे भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र पुलवामा के पास जमीन से लगभग 15 किलोमीटर की गहराई में था। रात के समय आए झटकों के कारण कई लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। हालांकि किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली।

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असम में भी महसूस हुए झटके

जम्मू-कश्मीर से पहले पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में भी भूकंप दर्ज किया गया। NCS के अनुसार 24 जून की रात करीब 12:34 बजे गोलपाड़ा जिले में 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 12 किलोमीटर नीचे था। झटके महसूस होने के बाद लोग कुछ समय के लिए घरों से बाहर निकल आए, लेकिन किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई।

मेघालय में आया हल्का भूकंप

24 जून को ही मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह करीब 8:08 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 2.9 मापी गई। कम तीव्रता होने की वजह से अधिकतर लोगों को इसका एहसास भी नहीं हुआ। प्रशासन के अनुसार कहीं से भी नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

जापान में भी कांपी धरती

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील देश जापान में भी गुरुवार को 6.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। झटके महसूस होते ही लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली है। जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर साल सैकड़ों भूकंप आते हैं। वहां की इमारतें भूकंपरोधी तकनीक से बनाई जाती हैं, जिससे बड़े हादसों की संभावना कम हो जाती है।

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नेपाल में भी हिली धरती

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी गुरुवार तड़के भूकंप आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.8 दर्ज की गई। भूकंप सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर महसूस किया गया। इससे पहले नेपाल के हुमला जिले में भी कुछ दिन पहले 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था। हालांकि दोनों घटनाओं में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

वेनेजुएला में दो बड़े भूकंप, मची अफरा-तफरी

वेनेजुएला में बुधवार शाम स्थानीय समय के अनुसार करीब एक मिनट के अंतराल में दो बड़े भूकंप आए। पहले भूकंप की तीव्रता 7.2 और दूसरे की 7.5 मापी गई। इतने शक्तिशाली झटकों के कारण राजधानी कराकास समेत कई इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचा। 
भूकंप के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों और दफ्तरों से निकलकर सड़कों पर आ गए। कई जगहों पर बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक 22 मंजिला इमारत भी भूकंप के कारण ढह गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पिछले कई दशकों में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।

आखिर क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी कई बड़ी-बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं या उनके बीच दबाव बढ़ जाता है, तो अचानक ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में महसूस होती है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। इसकी मुख्य वजह इंडियन टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार होने वाली टक्कर है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इंडियन प्लेट हर साल लगभग 5 सेंटीमीटर की गति से उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है। इस दौरान दोनों प्लेटों के बीच दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव ज्यादा बढ़ जाता है, तो ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है और भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी और जागरूकता से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भूकंप आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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