आपातकाल के 50 साल:भोपाल में होगा भव्य सम्मान समारोह, 2000 मीसाबंदी परिवारों को सम्मानित करेंगे CM डॉ. मोहन यादव

भोपाल। देश में लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम रवीन्द्र भवन में आयोजित होगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदियों को सम्मानित किया जाएगा।
इस समारोह में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक भी मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले करीब 2000 मीसाबंदी परिवारों के सदस्य भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद करना है जिन्होंने देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
CM डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम के दौरान मंच से स्वयं मीसाबंदियों और उनके परिवारों का सम्मान करेंगे। सरकार का कहना है कि यह सम्मान उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास है जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
क्या है आपातकाल दिवस?
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख को एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित दिन माना जाता है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। आधी रात को घोषित किया गया यह आपातकाल लगभग 21 महीनों तक चला और 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ।
इस अवधि को भारतीय लोकतंत्र के सबसे कठिन दौरों में से एक माना जाता है। उस समय देश में कई संवैधानिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी। नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई थी।
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प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगी थी रोक
आपातकाल के दौरान प्रेस और मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी। अखबारों और समाचार संस्थानों को सरकार की अनुमति के बिना कई खबरें प्रकाशित करने की अनुमति नहीं थी। सरकार की आलोचना करने वाली खबरों पर रोक लगा दी गई थी।
इसके अलावा कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद कर दिया गया था। हजारों लोग मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किए गए थे। इन्हीं लोगों को बाद में मीसाबंदी कहा गया।
लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद
भोपाल में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष को याद करने का भी अवसर होगा। कार्यक्रम में उन लोगों की कहानियों और अनुभवों को साझा किया जाएगा जिन्होंने आपातकाल के दौरान जेल की यातनाएं झेलीं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में अपने विचार रखेंगे और उस दौर की घटनाओं को याद करेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने वाले कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य आपातकाल के दौरान महीनों तक जेल में रहे थे।
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2000 से अधिक परिवार होंगे शामिल
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों की भागीदारी रहेगी। बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।











