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4 दिन और...देशभर से नक्लवाद का होगा सूपड़ा साफ! कई कैडर कर चुके सरेंडर, सुरक्षाबलों का नया ऑपरेशन जीने नहीं देगा

सरकार की रणनीति केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे अर्धसैनिक बलों की संख्या कम कर विकास योजनाओं को बढ़ावा देने की तैयारी भी है।
देशभर से नक्लवाद का होगा सूपड़ा साफ! कई कैडर कर चुके सरेंडर, सुरक्षाबलों का नया ऑपरेशन जीने नहीं देगा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    रायपुर। देश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर निर्णायक राउंड शुरू हो चुका है। जिनमें टॉप नक्सली लीडर पापा राव सहित कई कैडर ने सरेंडर किया है। केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन में अब महज चार दिन बाकी हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों ने देशभर के नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ा और अंतिम ऑपरेशन शुरू कर दिया है, जिसका मकसद बचे हुए नक्सली कैडर को या तो सरेंडर कराने का है या फिर उन्हें खत्म करना।

    31 मार्च तक 100% खात्मे का टारगेट

    ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, योजना के तहत 31 मार्च तक हथियारबंद नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करना है। यह समयसीमा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई है। उन्होंने साफ कहा है कि बचे हुए नक्सलियों को या तो मुठभेड़ में खत्म किया जाएगा या फिर उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जाएगा। इसके लिए अंतिम दिनों में बड़े स्तर पर सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

    अब भी 130-150 के बीच बचे हैं एक्टिव कैडर

    सुरक्षाबलों के अनुसार, अभी भी देश में 130 से 150 के बीच हथियारबंद नक्सली सक्रिय हैं। इनमें प्रतिबंधित माओवादी संगठन के केंद्रीय समिति के दो सदस्य और कुछ डिविजनल स्तर के ऑपरेटिव शामिल हैं। इनकी तलाश के लिए खुफिया इनपुट के आधार पर ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। साथ ही सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास योजनाओं का भी खाका तैयार कर रही है, ताकि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

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    झारखंड में छिपा है बड़ा माओवादी नेता

    सूत्रों के मुताबिक, एक शीर्ष माओवादी नेता झारखंड में छिपा हुआ है। उसकी तलाश के लिए CRPF की विशेष कमांडो यूनिट COBRA की 3-4 टीमें छत्तीसगढ़ से झारखंड भेजी जा रही हैं। बतापीया जा रहा है कि मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर इसी क्षेत्र में मौजूद है। सुरक्षा बलों की टीमें उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सघन अभियान चला रही हैं।

    बस्तर और बॉर्डर इलाकों में हाई अलर्ट

    छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र नक्सलवाद का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। यहां CRPF, BSF और ITBP की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा की सीमाओं पर भी संयुक्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि नक्सलियों के भागने के रास्तों को पूरी तरह बंद किया जा सके।

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    ऑपरेशन के साथ विकास पर भी जोर

    सरकार की रणनीति केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे अर्धसैनिक बलों की संख्या कम कर विकास योजनाओं को बढ़ावा देने की तैयारी भी है। इसका मकसद इन इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ना और नक्सलवाद की जड़ों को खत्म करना है। कुल मिलाकर, देश में नक्सलवाद के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान माना जा रहा है, जिसके परिणाम आने वाले दिनों में साफ नजर आ सकते हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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